BAREILLY TO PATAL BHUVANESHWAR II Ep-1😊 II OF ROADING II SNOWFALL ⛰️ II
Автор: Veeru Verma UP25
Загружено: 2026-02-03
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BAREILLY TO PATAL BHUVANESHWAR RIDE II Ep-1
PATAL BHUVANESHWAR II
Patal Bhuvaneshwar Cave: गणेशोत्सव को लेकर चारों तरफ धूम मचाई हुई है। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा से शेराघाट होते हुए 160 किमी की दूरी पर सीमान्त कस्बे के गंगोलीहाट में स्थित गुफा में भगवान गणेशजी का कटा हुआ सिर रखा हुआ है। इस गुफा में कई चमत्कार देखने को मिल दस दिवसीय गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। घरों और पंडालों में गजानन विराजमान हैं और पूरा माहौल गणपति भक्ति में डूबा हुआ है। गणेशोत्सव के मौके पर आज हम आपको पता रहे हैं कि एक गुफा के बारे में, जहां आज भी भगवान गणेश का कटा हुआ सिर रखा हुआ है। जब भगवान शिव ने क्रोध में आकर गणेशजी का सिर धड़ से अलग कर दिया था, तब बाद में माता पार्वती के कहने पर हाथी मस्तक लगा दिया था। उसके बाद कटे हुए सिर को शिवजी ने एक गुफा में सुरक्षित रख दिया था। आइए जानते हैं इस गुफा के बारे में भगवान शिव ने जहां भगवान गणेश का सिर रखा था, यह गुफा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में स्थित है। इस गुफा को पाताल भुवनेश्वर के नाम से जाना जाता है। ये गुफा पहाड़ के करीब 90 फीट अंदर है। यहां विराजित गणेशजी की मूर्ति को आदिगणेश के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस गुफा की खोज 1191 ई. में आदिशंकराचार्य द्वारा की गई थी। इसका वर्णन स्कंद पुराण के मानस खंड में किया गया पाताल भुवनेश्वर गुफा में चार युगों का प्रतीक के रूप में चार पत्थर मौजूद हैं। इनमें से एक पत्थर धीरे धीरे उपर उठ रहा है, उस पत्थर को कलयुग का प्रतीक माना जाता है। यह पत्थर एक हजार साल में एक बढ़ता है। बताया जाता है कि जिस दिन यह पत्थर दीवार से टकरा जाएगा, उस दिन कलियुग का अंत हो जाएगा पाताल भुवनेश्वर गुफा के बारे में बताया जाता है कि यहां भगवान गणेश और शिव के साथ तैंतीस कोटि देवी देवता विराजमान हैं। इस गुफा में बद्रीनाथ, केदारनाथ और अमरनाथ के भी दर्शन होते हैं। बद्रीनाथ में बद्री पंचायत की शिला रूप मूर्तियां हैं, जिनमें यम कुबेर, वरुण, लक्ष्मी, गरुड़ और गणेशजी शामिल हैं। इस पंचायत के ऊपर बाबा अमरनाथ की गुफा है और पत्थर की बड़ी बड़ी जटाएं फैली हुई हैं पाताल भुवनेश्वर गुफा में काल भैरव जीभ के भी दर्शन होते हैं। मान्यता है कि काल भैरव के मुंह से गर्भ में प्रवेश कर उसके अंत तक यानी पूंछ तक पहुंच जाएं तो उसको मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। गुफा में भगवान गणेश की शिला रूपी मूर्ति के उपर 108 पंखुड़ियों वाला शबाष्टक दल ब्रह्मकमल शोभायमान है। इस ब्रह्मकमल से भगवान गणेश के मस्तक पर जल की दिव्य बूंद टपकती है। मुख्य बूंद आदि गणेश के मुख पर गिरती दिखाई देती है। मान्यता है गुफा में मौजूद ब्रह्मकमल भगवान शिव ने ही स्थापित किया था। बताया जाता है कि इस गुफा की खोज त्रेता युग में अयोध्या के सूर्यवंशी राजा ऋतुपर्ण ने की थी। एक दिन वह जंगली हिरण का पीछा करते करते इस गुफा में पहुंच गए थे। राजा ने गुफा के अंदर महादेव समेत तैंतीस कोटि देवताओं के दर्शन किए थे।
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