ठंडी परसाई का इंतकाम| इंसानियत से बदला लेने आई एक डरावनी आत्मा | Horror Story
Автор: CARTOON_DHAMAKA
Загружено: 2026-01-14
Просмотров: 224
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ठंडी परसाई का इनतकाम ।। Hindi moral kahani//hindi kid's stories//Moral Stories#hindistorys#kahaniya
“हवा चल नहीं रही थी… वो चुभ रही थी।
बर्फ़ की नुकीली कीलों की तरह
सीधे जिस्म के आर-पार।” ❄️🩸
“धुआँ ऊपर उठ रहा था,
पर वो सीधा नहीं जा रहा था…
मानो किसी को ढूँढ रहा हो।” 🌫️👁️
“एक पल को सबने साफ़ महसूस किया—
पीछे से किसी ने
बहुत पास आकर फूँक मारी है।” 😮💨😱
“पीछे… कोई नहीं था।
सिर्फ़ अंधेरा।
और उस अंधेरे में
कुछ ऐसा… जो दिखता नहीं था,
पर मौजूद ज़रूर था।” 🕳️👤
“हवा कानों के बिल्कुल पास आई…
और फुसफुसाकर कहा—
‘ठं…ड…’
जैसे ये शब्द नहीं,
किसी की आख़िरी साँस हो।” 🥶🫥
“इस गाँव ने एक औरत को
ठंड में मरने दिया था…
वही हर साल लौटती है—
हवा बनकर।” 🌬️⚰️
“उस रात सरोज के पास
ना रजाई थी, ना छत…
सिर्फ़ बेरहम ठंड,
जो उसकी हड्डियों में
धीरे-धीरे उतर रही थी।” 🛏️🖤
“रजाई गायब थी…
जैसे कभी रही ही न हो।
और बाहर…
हवा और तेज़ हो गई।” 🎐😨
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“हवा चल नहीं रही थी… वो चुभ रही थी।
बर्फ़ की नुकीली कीलों की तरह
सीधे जिस्म के आर-पार।” ❄️🩸
“धुआँ ऊपर उठ रहा था,
पर वो सीधा नहीं जा रहा था…
मानो किसी को ढूँढ रहा हो।” 🌫️👁️
“एक पल को सबने साफ़ महसूस किया—
पीछे से किसी ने
बहुत पास आकर फूँक मारी है।” 😮💨😱
“पीछे… कोई नहीं था।
सिर्फ़ अंधेरा।
और उस अंधेरे में
कुछ ऐसा… जो दिखता नहीं था,
पर मौजूद ज़रूर था।” 🕳️👤
“हवा कानों के बिल्कुल पास आई…
और फुसफुसाकर कहा—
‘ठं…ड…’
जैसे ये शब्द नहीं,
किसी की आख़िरी साँस हो।” 🥶🫥
“इस गाँव ने एक औरत को
ठंड में मरने दिया था…
वही हर साल लौटती है—
हवा बनकर।” 🌬️⚰️
“उस रात सरोज के पास
ना रजाई थी, ना छत…
सिर्फ़ बेरहम ठंड,
जो उसकी हड्डियों में
धीरे-धीरे उतर रही थी।” 🛏️🖤
“रजाई गायब थी…
जैसे कभी रही ही न हो।
और बाहर…
हवा और तेज़ हो गई।” 🎐😨
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