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#250. परिणमन निरपेक्ष होता है और कथन सापेक्ष होता है | श्री कु. सा. वसदि, शिखर जी, सुबह. 11.01
#234. वेदनीय कर्म बंध का कारण - ज्ञेयलुब्धता | श्री कु. सा. वसदि, शिखर जी, सुबह. 03.01
#249. आत्मचिंतन द्रव्य-क्षेत्र-काल-भाव-भव की कामना का नाशक है | श्री कु.सा.वसदि, शिखरजी, दोपहर.10.01
मेरी सैयल रे, साह आए थे मेरे घर। डॉ प्रवीण जी #spjin #spjinmusic #pranamibhajan #shrirajanswamiji
पहली प्रतिमा कैसी होती है /9 Jan26/ #मुनिश्री #निर्लोभसागरजीमहाराज #तिलवाराघाट #जबलपुर
01 कर्म सिद्धांत और आत्म शांति Jain Society of Central Florida USA
10/01/26"श्री मोक्षमार्ग प्रकाशक जी" चौथा अधिकार मिथ्याज्ञान का स्वरूप आ.पं.श्री राजेंद्र जी जबलपुर
#247. ध्रुव की महिमा आने से ही कषाय जाती है | श्री कु. सा. वसदि, शिखर जी, दोपहर. 09.01
सचमुच बदल जाओगे#सबसे अद्भुत संदेश#meditation#avinashjain#lalitpur#ravibothrasiliguri#devotional
#233. क्यों है जैन धर्म 'प्रधानं सर्व धर्माणाम्'? | कुन्दकुन्द कहान नगर, शिखर जी, सायं. 02.01
समवशरण में आचार्यश्री के प्रवचन | Kundalpur Panchkalyanak | Kundalpur Mahamahotsav 2022
#236. ज्ञानावरणीय-दर्शनावरणीय के बंध में मोहनीय की भूमिका- Part 1|श्री कु.सा.वसदि, शिखरजी,सुबह.04.01
#243. कोई कर्म का उदय सम्यग्दर्शन में बाधक नहीं | श्री कु. सा. वसदि, शिखर जी, दोपहर. 07.01
#230. हम अपने मन,वचन,काया और परिणामों में कुछ नहीं कर सकते| कुन्दकुन्द कहान नगर, शिखरजी, सायं. 31.12
#246. अनंतानुबंधी चार कषाय और नौ नोकषाय का स्वरूप | श्री कु. सा. वसदि, शिखर जी, सुबह. 09.01
श्रावक की 11 प्रतिमा । दर्शन प्रतिमा । मुनि क्षमासागर जी प्रवचन । @aagamkeparipekshme
जानिए मंत्र जाप से पापों ना नाश कैसे होता है | 01 Jan 2026 | Muni Veersagarji Maharaj #veersagarji
#248. पँच परावर्तन की चर्चा, ज्ञान स्वभाव के माध्यम से | श्री कु. सा. वसदि, शिखर जी, सुबह. 10.01
विशेष स्वाध्याय श्रीमान संजयजी छिन्दवाड़ा के घर
कर्म कहाँ से आता है कैसे बंधता है दिखाई नहीं देता पर उसका फल क्यों दिखता है || Samayagar Ji Maharaj