महासंग्राम महाभारत | भीम दुशासन युद्ध | प्रकरण 5
Автор: Bharat Ki Amar Kahaniyan
Загружено: 2026-02-15
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"भीम कौरवों पर काल बनके टूट पड़ता है। भीम दुशासन से युद्ध करने के लिए पहुँच जाता है और उस से युद्ध करने के लिए कहता है। भीम और दुशासन में युद्ध शुरू हो जाता है। दूसरी और राजा शैलय और युधिष्ठिर में युद्ध शुरू हो जाता है और युधिष्ठिर अपने मामा शैलय का वध कर देता है। धृतराष्ट्र यह सब संजय से सुन रहा था और इन सब बातों से उसे अपने पुत्रों के अंत का दृश्य देखने लगता है। भीम और दुशासन में युद्ध चल रहा होता है जो गदा युद्ध में बदल जाता है भीम दुशासन को गदा युद्ध में हरा देता है और उसके दोनों भुजाएँ उखाड़ देता है और अपने हाथों से उसका सीना चिर कर उसकी हथ्य कर देता है भीम अपनी पहली प्रतिज्ञा को पूर्ण कर देता है। भीम दुशासन का वध करने के बाद उसका रक्त अपने हाथों में भर कर द्रौपदी के पास ले जाता है और द्रौपदी अपने बलों को दुशासन के रक्त से धोती है। कौरवों के शिविर में कृपाचार्य दुर्योधन को कहते हैं की हमें युद्ध को समाप्त कर देने के लिए कहता है लेकिन दुर्योधन उन्हें क्रोध में आकर कहता है की पांडवों ने मेरे सभी भाइयों का वध कर दिया मेरे पुत्रों को मार दिया मेरे मित्रों और रिश्तेदारों को मार है मैं उनसे युद्ध ज़रूर करूँगा।
दुर्योधन क्रोध में आकर रात्रि में ही उन्हें मारने के रणनीति बनाता है। लेकिन दुर्योधन को अश्वत्थामा और कृपाचार्य समझाते हैं की ऐसा करना ठीक नहीं होगा और हम पांडवों से युद्ध फिर कभी कर लेंगे हम दोबारा से अपनी ताक़त को मज़बूत करके पांडवों से युद्ध करने आएँगे इसके लिए तुम्हारा ज़िंदा रहना ज़रूरी है इसलिए फ़िलहाल तुम्हें युद्ध को छोड़कर कहीं छिप जाना चाहिए। दुर्योधन उनकी बात माल लेता है और एक सरोवर में जाकर छिपने के लिए चला जाता है। अगले दिन जब पांडव युद्ध भूमि में अपनी सेना के साथ आते हैं तो उन्हें वहाँ कौरव नहीं मिलते। श्री कृष्ण के कहने पर पांडव कौरवों के शिविर में जाते हैं जहां उन्हें पता चलता है की दुर्योधन वहाँ से भाग गया है। युधिष्ठिर अपने गुप्तचरों को दुर्योधन को खोजने के लिए भेजता है। अश्वत्थामा और कृपाचार्य भी युद्ध भूमि से भाग जाते हैं। भीम और नकुल भी अपनी सेना के साथ दुर्योधन को खोजने के लिए जाते हैं। भीम दुर्योधन के सरोवर तक पहुँच जाता है और वहाँ विश्राम करने के लिए बैठ जाता है। भीम सरोवर की जमा हुआ देख हैरान हो जाता है और उसे जमे हुए सरोवर को तोड़ने की कोशिश करने के बाद वहाँ से चला जाता है।
पांडवों के गुप्तचर अश्वत्थामा, कृपाचार्य और कृतवर्मा को वन में देख लेते हैं और उनका पीछा करते हुए दुर्योधन तक पहुँच जाते हैं। दुर्योधन सरोवर से बाहर निकलता है और चारों दुर्योधन को किसी ओर स्थान पर छिपने के लिए कहते हैं। पांडवों के गुप्तचर दुर्योधन के बारे में पांडवों को जाकर बताते हैं। पांडव अपनी सेना के साथ उस सरोवर पर आ जाते हैं। युधिष्ठिर जमे हुए सरोवर को फिर से पिघला देते हैं और दुर्योधन को युद्ध करने के लिए सरोवर से बाहर निकलने के लिए कहते हैं। पांडव दुर्योधन को अपमानित करते हैं ताकि वह बाहर आ जाए। दुर्योधन उनकी बातों से क्रोधित हो कर उनसे युद्ध करने के लिए बाहर आ जाता है। युधिष्ठिर भीम को कहता है की तुम यदि गदा से युद्ध करना चाहते हो तो भीम से लड़ो, यदि धनुष बाण से लड़ना है तो अर्जुन है, यदि तलवार से लड़ना है तो नकुल है और यदि तुम भले से युद्ध करना चाहते हो तो मैं स्वयं तुमसे युद्ध करूँगा। हम पांडवों में से तुम जिस से भी युद्ध करोगे वह अकेले हाई तुमसे युद्ध करेगा और यदि तुम जित जाते हो तो सारी पृथ्वी के तुम हाई राजा बन जाओगे। दुर्योधन युद्ध करने के लिए भीम को चुन लेता है। दुर्योधन और भीम में युद्ध शूर हो जाता है।
बलराम भी उनकी ओर आ रहे होते हैं। भीम और दुर्योधन दोनों एक दूसरे से पूरी ताक़त से युद्ध करते हैं। बलराम अपने दोनों शिष्यों को आपस में युद्ध करने से रोकने के लिए आते हैं। लेकिन श्री कृष्ण उन्हें समझाते हैं की इस युद्ध का अंत होने दें। भीम दुर्योधन को हरा रहा था और उसे घायल कर देता है भीम दुर्योधन के जाँघों पर वार करता है। बलराम भीम द्वारा गदा युद्ध के नियमों का उलंघन करने के कर्ण भीम पर क्रोधित हो जाते हैं और उसे दंड देने के लिए आगे बढ़ते हैं तो श्री कृष्ण बलराम को समझाते हैं की भीम ने अपनी प्रतिज्ञा को पूर्ण करने के लिए ऐसा किया है और इसमें कोई अधर्म नहीं है। श्री कृष्ण की बातों को सुन बलराम वहाँ से चले जाते हैं और भीम दुर्योधन का वध कर देता है। पांडव वहाँ से चले जाते हैं। लेकिन दुर्योधन मरता नहीं है क्योंकि वह साँस और हृदय को रोकने की विद्या का इस्तेमाल करता है जिस से पांडव भ्रमित हो जाते हैं। पांडव अपनी विजय की ख़ुशियाँ मनाते हुए शंखनाद करते हुए वहाँ से चले जाते हैं। कृपाचार्य, अश्वत्थामा और कृतवर्मा कौरव के पास रात्रि में आते हैं और दुर्योधन को घायल अवस्था में देख दुःखी हो जाते हैं। अश्वत्थामा रात्रि में ही सोते हुए पांडवों को मारने की प्रतिज्ञा लेता है।"
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