अष्ट यक्षिणी कथा, साधना और मंत्र दीक्षा # प्राप्त होगी एक साथ अनेक अलौकिक शक्तियाँ,धन संपत्ति##
Автор: Jyotish aur Aalokik Shaktiyan , Shakti Kendra
Загружено: 2025-10-28
Просмотров: 56
Описание:
अष्ट यक्षिणी उपासना (ध्यानात्मक स्वरूप में)
अष्ट यक्षिणियाँ — शक्ति के भिन्न-भिन्न रूप हैं।
प्रत्येक यक्षिणी “देवी लक्ष्मी” की ही उपशक्ति मानी जाती है।
नीचे उनके नाम, स्वरूप, ध्यान और ध्यानात्मक बीज-मंत्र (प्रतीकात्मक रूप) दिए गए हैं।
🌺 1️⃣ वेदना यक्षिणी
स्वरूप: गम्भीर, पृथ्वी तत्व से जुड़ी। तप और स्थैर्य की अधिष्ठात्री।
ध्यान: सुनहरे वस्त्र, हाथ में कमल व त्रिशूल, शांति से बैठी।
मंत्र (ध्यान रूप):
“ॐ ह्रीं वेदना देवि नमः।”
भाव: जीवन में स्थिरता, दृढ़ निश्चय, और लक्ष्य सिद्धि का संकल्प।
🌺 2️⃣ करङ्किनी यक्षिणी
स्वरूप: जल तत्व की अधिष्ठात्री, आकर्षण और करुणा का प्रतीक।
ध्यान: नीले वस्त्र, चन्द्र के समान शीतल तेज।
मंत्र (ध्यान रूप):
“ॐ श्रीं करङ्किन्यै नमः।”
भाव: करुणा, प्रेम, और लोकसंग्रह।
🌺 3️⃣ वैजयंती यक्षिणी
स्वरूप: अग्नि तत्व से जुड़ी, विजय और पराक्रम की देवी।
ध्यान: लाल आभा से प्रकाशित, रत्नमालाधारी।
मंत्र (ध्यान रूप):
“ॐ ऐं वैजयंत्यै नमः।”
भाव: सभी कार्यों में सफलता और आत्मबल की वृद्धि।
🌺 4️⃣ मदना यक्षिणी
स्वरूप: वायु तत्व की अधिष्ठात्री, प्रेम और सौंदर्य का प्रतीक।
ध्यान: गुलाबी आभा वाली, वीणा धारण किए।
मंत्र (ध्यान रूप):
“ॐ क्लीं मदनायै नमः।”
भाव: आकर्षण, कला, और संवाद-कौशल का विकास।
🌺 5️⃣ अनुपमा यक्षिणी
स्वरूप: आकाश तत्व की शक्ति, त्याग और आत्मज्ञान की प्रतीक।
ध्यान: धवल वस्त्र, कमलासन पर ध्यानमग्न।
मंत्र (ध्यान रूप):
“ॐ हौं अनुपमायै नमः।”
भाव: आत्मबोध, विवेक और अंतःशांति की प्राप्ति।
🌺 6️⃣ रूपवती यक्षिणी
स्वरूप: मन तत्व से संबद्ध, तेज, सौंदर्य और आभा की अधिष्ठात्री।
ध्यान: स्वर्णाभ तेजयुक्त, दर्पण व कमलधारी।
मंत्र (ध्यान रूप):
“ॐ सौः रूपवत्यै नमः।”
भाव: आत्मविश्वास, व्यक्तित्व, और आभा का विकास।
🌺 7️⃣ लक्ष्मिणी यक्षिणी
स्वरूप: बुद्धि तत्व की अधिष्ठात्री, धन, बुद्धि और नीति की देवी।
ध्यान: चार भुजाएँ, पद्म पर स्थित, सोने की आभा से युक्त।
मंत्र (ध्यान रूप):
“ॐ श्रीं ह्रीं लक्ष्मिण्यै नमः।”
भाव: धन, प्रगति और शुभ-फल का आशीर्वाद।
🌺 8️⃣ आद्या यक्षिणी
स्वरूप: चित्त तत्व की अधिष्ठात्री, सर्वशक्तिमान आदि-शक्ति।
ध्यान: काली आभा, त्रिनेत्र, शक्ति-मुद्रा में स्थित।
मंत्र (ध्यान रूप):
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं आद्यायै नमः।”
भाव: परम ऊर्जा से जुड़ाव, आत्मसाक्षात्कार।
Повторяем попытку...
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео
-
Информация по загрузке: