ycliper

Популярное

Музыка Кино и Анимация Автомобили Животные Спорт Путешествия Игры Юмор

Интересные видео

2025 Сериалы Трейлеры Новости Как сделать Видеоуроки Diy своими руками

Топ запросов

смотреть а4 schoolboy runaway турецкий сериал смотреть мультфильмы эдисон
Скачать

पूर्वरंग श्री समयसार हिंदी गाथाऐShri Samaysar Hindi Gath No. 1 to 38

Автор: VJainStro Presented By Vijaya Jain

Загружено: 2018-01-07

Просмотров: 40214

Описание: ||पूर्वरंग अधिकार||
ध्रुव अचल अरु अनुपम गति, पाये हुये सब सिद्ध को
मैं वंदू श्रुत केवलि कथित, कहूँ समय प्राभ्रत को अहो

जीव चरित्र दर्शन ज्ञान स्थित, स्वसमय निश्चय जानना
स्थित कर्म पुद्गल के प्रदेशों, पर समय जीव जानना

एकत्व निश्चय गत समय, सर्वत्र सुंदर लोक में
उससे बने बंधन कथा, जु विरोधनी एकत्व में

है सर्व श्रुत-परिचित-अनुभुत, भोग बंधन की कथा
पर से जुदा एकत्व की, उपलब्धि केवल सुलभ न

दर्शाऊँ एक विभक्त को, आत्मतने निज विभव से
दर्शाऊँ तो करना प्रमाण, न छल ग्रहो स्खलना बनो

नहिं अप्रमत्त प्रमत्त नहिं, जो एक ज्ञायक भाव है
इस रीति शुद्ध कहाय अरु, जो ज्ञात वो तो वो हि है

चरित्र दर्शन ज्ञान भी, व्यवहार कहता ज्ञानिके
चरित्र नहीं दर्शन नहीं, नहिं ज्ञान ज्ञायक शुद्ध है

भाषा अनार्य बिना न, समझाना ज्यूं शक्य अनार्य को
व्यवहार बिन परमार्थ का, उपदेश होय अशक्य यों

इस आत्म को श्रुत से नियत, जो शुद्ध केवल जानते
ऋषि गण प्रकाशक लोक के, श्रुत केवलि उन को कहे

श्रुत ज्ञान सब जाने, जु जिन श्रुत केवलि उसको कहें
सब ज्ञान सो आत्मा हि है, श्रुत केवली उससे बने

व्यवहार नय अभूतार्थ दर्शित, शुद्धनय भूतार्थ है
भूतार्थ दर्शित आत्मा, सुद्रष्टि निश्चय होय है

देखै परम जो भाव उसको, शुद्धनय ज्ञातव्य है
ठहरा जो अपरमभाव में, व्यवहार से उपदिष्ट है

भूतार्थ से जाने अजीव जीव, पुण्य पापरु निर्जरा
आश्रव संवर बंध मुक्ति, ये ही समकित जानना

अनबद्ध स्पष्ट अनन्य अरु, जो नियत देखे आत्मको
अविशेष अनसंयुक्त उसको शुद्धनय तू जानजो

अनबद्ध स्पष्ट अनन्य जो, अविशेष देखे आत्म को
वो द्रव्य ओर जु भाव, जिनशासन सकल देखे अहो

दर्शन सहित नित ज्ञान अरु, चरित्र साधु सेवीये
पर ये तीनों आत्मा ही केवल, जान निश्चयद्रष्टि में

ज्यों पुरुष कोई न्रपति को भी, जानकार श्रद्धा करे
फिर यत्न से धन अर्थ वो, अनुचरण राजा का करे

जीवराज को यों जानना, फिर श्रद्धना इस रीति से
उसका ही करना अनुचरण, फिर मोक्ष अर्थी यत्न से

नो कर्म कर्म जु “मैं” अवरू, “मैं” में कर्म नोकर्म है
यह बुद्धि जब तक जीव की, अज्ञानी तब तक वो रहे

मैं ये अवरू ये मैं, मैं हूँ इनका अवरू ये हैं मैंरे
जो अन्य हैं पर द्रव्य मिश्र, सचित्त अगर अचित्त वे

मेरा ही यह था पूर्व मैं, मैं इसी का गत काल में
यह होयगा मैंरा अवरू, मैं इसका हूंगा भावी में

अयथार्थ आत्म विकल्प, ऐसा मूढ़ जीव हि आचरे
भूतार्थ जाननहार ज्ञानी, ए विकल्प नहीं करे

अज्ञान मोहित बुद्धि जो, बहुभाव संयुत जीव है
ये बद्ध और अबद्ध, पुद्गल द्रव्य मेरा वो कहे

सर्वज्ञ ज्ञानविषे सदा, उपयोग लक्षण जीव है
वो कैसे पुद्गल हो सके जो, तू कहे मेरा अरे

जो जीव पुद्गल होए, पुद्गल प्राप्त हो जीवत्व को
तू तब हि ऐसा कह सके, “है मेरा” पुद्गल द्रव्य को

जो जीव होए न देह तो, आचार्य वा तीर्थेश की
मिथ्या बने स्तवना सभी, सो एकता जीव देह की

जीव देह दोनों एक हैं, यह वचन है व्यवहार का
निश्चयविषे तो जीव देह, कदापि एक पदार्थ ना

जीव से जुदा पुद्गलमयी, इस देह की स्तवना करी
माने मुनि जो केवली, वन्दन हुआ स्तवना हुई

निश्चयविषे नहीं योग्य ये, नहीं देह गुण केवलि हि के
जो केवलि गुण को स्तवे, परमार्थ केवलि वो स्तवे

रे ग्राम वर्णन करने से, भूपाल वर्णन हो ना ज्यों
त्यों देह गुण के स्तवन से, नहीं केवलि गुण स्तवन हो

कर इंद्रियजय ज्ञान स्वभाव रु, अधिक जाने आत्म को
निश्चयविषे स्थित साधुजन, भाषे जितेंद्रिय उन्हीं को

कर मोहजय ज्ञान स्वभाव रु, अधिक जाने आत्मा
परमार्थ विज्ञायक पुरुष ने, उन हि जितमोही कहा

जित मोह साधु पुरुष का जब, मोह क्षय हो जाय है
परमार्थ विज्ञायक पुरुष, क्षीणमोह तब उनको कहे

सब भाव पर ही जान, प्रत्याख्यान भावों का करे
इससे नियम से जानना कि, ज्ञान प्रत्याख्यान है

ये और का है जानकार, परद्रव्य को को नर तजे
त्यों और के हैं जानकार, परभाव ज्ञानी परित्यजे

कुछ मोह वो मेरा नहीं, उपयोग केवल एक मैं
इस ज्ञान को ज्ञायक समय के, मोह निर्ममता कहे

धर्मादि वे मेरे नहीं, उपयोग केवल एक हूँ
इस ज्ञान को ज्ञायक समय के, धर्म निर्ममता कहे

मैं एक शुद्ध सदा अरूपी, ज्ञान द्रग हूँ यथार्थ से
कुछ अन्य वो मेरा तनिक, परमाणुमात्र नहीं अरे

Не удается загрузить Youtube-плеер. Проверьте блокировку Youtube в вашей сети.
Повторяем попытку...
पूर्वरंग श्री समयसार हिंदी गाथाऐShri Samaysar Hindi Gath No. 1 to 38

Поделиться в:

Доступные форматы для скачивания:

Скачать видео

  • Информация по загрузке:

Скачать аудио

Похожие видео

जीवाजीव अधिकार श्री समयसार हिंदी गाथाएँ  Shri Samaysar Hindi GathaNo.39 to 68 by KundKundacharya Dev

जीवाजीव अधिकार श्री समयसार हिंदी गाथाएँ Shri Samaysar Hindi GathaNo.39 to 68 by KundKundacharya Dev

आत्मन् कलरव | बाल ब्र. पण्डित रवीन्द्र जी 'आत्मन्' | आध्यात्मिक पाठ संग्रह

आत्मन् कलरव | बाल ब्र. पण्डित रवीन्द्र जी 'आत्मन्' | आध्यात्मिक पाठ संग्रह

⚡️ Военная техника заходит в города || РФ объявила срочную эвакуацию

⚡️ Военная техника заходит в города || РФ объявила срочную эвакуацию

कर्ता-कर्म अधिकार श्री समयसार हिंदी गाथाएँ Shri Samaysar Hindi Gath No.69 to144  KundKundacharya dev

कर्ता-कर्म अधिकार श्री समयसार हिंदी गाथाएँ Shri Samaysar Hindi Gath No.69 to144 KundKundacharya dev

श्री समयसार गाथा पद्यानुवाद (हिंदी) || डॉ.हुकमचंद भारिल्ल || #drbharill  #ptst

श्री समयसार गाथा पद्यानुवाद (हिंदी) || डॉ.हुकमचंद भारिल्ल || #drbharill #ptst

बारह भावना : डॉ. हुकुमचंद जी भारिल्ल कृत रचना की नवीन प्रस्तुति : #12bhavna

बारह भावना : डॉ. हुकुमचंद जी भारिल्ल कृत रचना की नवीन प्रस्तुति : #12bhavna

ॐ नमः शिवाय धुन | Om Namah Shivaya ShivDhun | NonStop ShivDhun | Daily Mantra | Ananya Prakash

ॐ नमः शिवाय धुन | Om Namah Shivaya ShivDhun | NonStop ShivDhun | Daily Mantra | Ananya Prakash

Antardhvani

Antardhvani

1. श्री समयसार गाथा पद्यानुवाद - पूर्वरंग || गाथा 1-38 || डॉ.हुकमचंद भारिल्ल || #drbharill #ptst

1. श्री समयसार गाथा पद्यानुवाद - पूर्वरंग || गाथा 1-38 || डॉ.हुकमचंद भारिल्ल || #drbharill #ptst

Sukh Aate Hai Dukh Aate Hai सुख आते है दुःख आते है Animated Jain Bhajan For Kid's Adhyatmik Lori

Sukh Aate Hai Dukh Aate Hai सुख आते है दुःख आते है Animated Jain Bhajan For Kid's Adhyatmik Lori

3. श्री समयसार गाथा पद्यानुवाद - कर्ताकर्म अधिकार || गाथा 69-144 || डॉ.हुकमचंद भारिल्ल || #ptst

3. श्री समयसार गाथा पद्यानुवाद - कर्ताकर्म अधिकार || गाथा 69-144 || डॉ.हुकमचंद भारिल्ल || #ptst

बारह भावना बड़ी || कहा गये चक्री.. || Barah Bhavna Badi || Lyrics || Kaha Gaye Chakri.. ||

बारह भावना बड़ी || कहा गये चक्री.. || Barah Bhavna Badi || Lyrics || Kaha Gaye Chakri.. ||

कुंदकुंद शतक (नवीन)। Kund Kund Shatak (New Album) |आचार्य कुंदकुंददेव । Dr. HukamChand Bharill

कुंदकुंद शतक (नवीन)। Kund Kund Shatak (New Album) |आचार्य कुंदकुंददेव । Dr. HukamChand Bharill

Apurva Avsar By. Shrimad RajChandra Hindi

Apurva Avsar By. Shrimad RajChandra Hindi

ॐ नमः शिवाय धुन | Om Namah Shivaya ShivDhun | NonStop ShivDhun | Daily Mantra | Ananya Prakash

ॐ नमः शिवाय धुन | Om Namah Shivaya ShivDhun | NonStop ShivDhun | Daily Mantra | Ananya Prakash

ध्रुवरूप अहो! मम अंतर में | Dhruvroop Aho Mam Antar Men | श्रद्धेय बा. ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’

ध्रुवरूप अहो! मम अंतर में | Dhruvroop Aho Mam Antar Men | श्रद्धेय बा. ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’

Samayik Path | सामायिक पाठ : भावना बत्तीसी | Gaurav Jain | Deepshikha Jain #samayikpath #pratikraman

Samayik Path | सामायिक पाठ : भावना बत्तीसी | Gaurav Jain | Deepshikha Jain #samayikpath #pratikraman

Samaysaar Purvarang (Gujarati) With Lyrics | Gatha 1-38 | સમયસાર ગુજરાતી પદ્યાનુવાદ | ગાથા-૧-૩૮

Samaysaar Purvarang (Gujarati) With Lyrics | Gatha 1-38 | સમયસાર ગુજરાતી પદ્યાનુવાદ | ગાથા-૧-૩૮

9.सर्वविशुद्धज्ञानअधिकार|श्री समयसार हिंदी गाथाएँ Shri Samaysar Hindi Gath No.308 to 415

9.सर्वविशुद्धज्ञानअधिकार|श्री समयसार हिंदी गाथाएँ Shri Samaysar Hindi Gath No.308 to 415

PRABHU BHAKTI SATAK

PRABHU BHAKTI SATAK

© 2025 ycliper. Все права защищены.



  • Контакты
  • О нас
  • Политика конфиденциальности



Контакты для правообладателей: [email protected]