णमोकार महामंत्र की सिद्धि कैसे करें || Mahamantra || Yog Bhooshan Maharaj
Автор: Yog Bhooshan Maharaj
Загружено: 2021-03-01
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णमोकार महामंत्र की सिद्धि कैसे करें?
◆ मंत्रों में शक्ति होती हैं। मंत्र ब्रह्माण्ड की ध्वनि होते हैं। मंत्र का निर्माण कैसे होता हैं ? आख़िर मंत्र कैसे आपके जीवन पर प्रभाव डालते हैं ? पहली बार देश के सबसे ज्ञानी मंत्र महर्षि योगभूषण जी महाराज लेकर आ रहे हैं मंत्रों का मूल ज्ञान।
◆ #मंत्रसाधना और #मंत्रसिद्धि के बारे में अनेकों रहस्य हैं, सभी लोगों के अंतरंग में इस विद्या के बारे में अनेकों जिज्ञासा हैं जिनका सरल और सटीक समाधान हम यहां इस चैनल के माध्यम से कर रहे हैं ।
◆ अपने अंदर छिपी हुई #आध्यात्मिक शक्तियों को जगाने का एकमात्र माध्यम है #मंत्र #साधना, जिसके लिए अलग अलग व्यक्ति अलग अलग तरह से उपाय और प्रयास करते हैं।
◆ णमोकार महामंत्र अत्यंत महिमावान,.चमत्कारी सर्वकार्य सिद्धि प्रदायक, सर्व विघ्न विनाशक, सभी पापों का नाश करने वाला हैं सही मायने में णमोकार महामंत्र ही मुक्ति प्रदायक मंत्र हैं।
◆ जब कोई तीर्थंकर मुनिराज दीक्षा लेने जाते हैं जैनेश्वरी दीक्षा धारण करते हैं तब वे भी इसी महामंत्र के एक पद अर्थात् नमः सिद्धेभ्य का उच्चारण करते हैं, मुक्ति की शुरुआत भी इसी मंत्र से होती हैं इसलिए यह मुक्ति प्रदायक मंत्र हैं और इसकी साधना संसार के सभी दुखों से छुड़ाकर हमें मुक्ति का मार्ग दिखलाती हैं।
◆ शास्त्रों में, णमोकार महामंत्र की सिद्धि के संदर्भ में लिखा हैं कि जो व्यक्ति संसार के संसार से मुक्ति प्राप्त करना चाहता हैं वह व्यक्ति अपने जीवन में 8 करोड़ 8 लाख 8 हजार 8 सौ आठ मंत्र की साधना करें, जो व्यक्ति लगातार इस मंत्र की 7 लाख जाप करता हैं वह व्यक्ति सभी प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता हैं, सवा करोड़ मंत्र की जाप करने से इस मंत्र की सिद्धि होती हैं, सवा लाख जाप से इष्टकार्य की सिद्धि होती हैं और गुरु के मार्गदर्शन और शुभ मुहूर्त में ही जाप प्रारंभ करनी चाहिए।
◆ णमोकार महामंत्र को जपने की विधि के संदर्भ में लिखा हैं कि आती जाती सांसों पर ही णमोकार महामंत्र का चिंतन (जाप) करना चाहिए अर्थात् हर श्वास में मंत्र का स्मरण हो।
• जब श्वास अंदर ले (णमो अरिहंताणं)
• जब श्वास को बाहर छोड़ें (णमो सिद्धाणं)
• जब श्वास अंदर ले (णमो आइरियाणं)
• जब श्वास को बाहर छोड़े (णमो उवज्झायाणं)
• जब श्वास अंदर ले (णमो लोए)
• जब श्वास बाहर छोड़ें (सव्व साहूणं)
• जब श्वास अंदर गई (श्वास)
• जब श्वास बाहर गई (उच्छवास)
• श्वास + उच्छवास = श्वासोच्छवास
◆ प्राणायाम की विधि :-
• श्वास अंदर लेना अर्थात् पूरक
• श्वास को बाहर छोड़ना अर्थात् रेचक
• श्वास को अंदर रोकना अर्थात् अंतः कुंभक
• श्वास को बाहर रोकना अर्थात् बाह्य कुंभक
◆ मंत्र की सिद्धि के लिए सही मंत्र, सही उच्चारण, सही विधि, सही गुरु और सही समय से ही मंत्र की सिद्धि होती हैं।
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स्वस्थ, सुखद एवं समृद्धशाली जीवन के प्राचीनतम महाविज्ञान को हम तक पहुंचाने वाले परम श्रद्धेय मंत्र महर्षि श्री योगभूषण जी महाराज एक मानवतावादी आध्यात्मिक संत हैं, जो मानवीय जीवन के उत्थान, कल्याण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए समर्पित हैं ।
जिनके धार्मिक - वैज्ञानिक प्रवचन जन - गण - मन में एक दिव्य ऊर्जा का संचार करते हैं, जिनकी ओजपूर्ण वाणी जन-जन को भारतीय संस्कृति और धर्म से जोड़ती हैं, ऐसे धर्मयोगी संत श्री योगभूषण जी महाराज की वाणी को इस चैनल के द्वारा आप तक पहुंचाया जा रहा हैं।
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