मेरे बच्चों ने जानबूझकर 21 साल तक मुझे भुला दिया, इसलिए मैंने अपना नाम बदल लिया और कभी वापस नहीं लौ…
Автор: पर्दा उठा सच
Загружено: 2025-12-06
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💔 जब मेरे बेटे के दफ्तर के महाप्रबंधक ने पूछा कि मैं कौन हूं, तो मेरे अपने बेटे ने कहा - ये हमारी घरेलू सहायिका हैं। उस पल मेरे अंदर कुछ टूट गया, लेकिन असली सच्चाई तो मुझे बाद में पता चली।
🏚️ मैंने अपना घर बेच दिया था उसकी पढ़ाई के लिए। अपने सारे गहने बेच दिए थे। रात रात भर जागकर सिलाई का काम किया था। लेकिन आज जब मैं उनके घर में रहने आई, तो मुझे एहसास हुआ कि शायद मेरी सारी कुर्बानियां किसी और के लिए थीं, उन बच्चों के लिए नहीं जो अब मेरे सामने खड़े थे।
😢 इक्कीस साल तक मैंने सोचा था कि मैं अपने बच्चों का भविष्य बना रही हूं। लेकिन क्या हुआ जब वो भविष्य बन गया? क्यों मुझे उस घर के पिछले हिस्से के छोटे से कमरे में रखा गया? क्यों मेरी तस्वीरें गायब हो गईं? और सबसे बड़ा सवाल - मेरे पोते पोती मुझे क्यों नहीं पहचानते?
🔍 मुझे कुछ पुराने पत्र मिले थे, जिनमें मेरे बेटे ने लिखा था - मां, तुमने जो किया है वो मैं कभी नहीं भूलूंगा। लेकिन अब जब मैं उन्हीं पत्रों को देखती हूं, तो एक सवाल उठता है - वो बेटा कहां गया जिसने ये वादे किए थे?
✊ मैंने तय कर लिया है कि अब मैं चुप नहीं रहूंगी। मैंने अपना नाम बदल लिया है। एक नई पहचान बनाई है। और दो महीने बाद जब मैं उन सभी रसीदों और कागजों के साथ वापस जाऊंगी, तब शायद उन्हें याद आएगा कि किसने उनके लिए सब कुछ बलिदान कर दिया था।
क्या मेरे बच्चों ने सच में मुझे भुला दिया था? क्या हुआ जब मुझे पूरी सच्चाई पता चली? और मैंने आखिर में क्या फैसला लिया? पूरी कहानी जानने के लिए ये वीडियो अंत तक देखिए।
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