मोहे अपने ही रंग में रंग दे, रंगीले।। कौशल पवैया kaushal pawaiya
Автор: Kaushal Pawaiya Bhajan
Загружено: 2026-03-05
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गोरी सोई सेज पर, मुख पेय डारे केस।
चल खुसरो घर आपने, रैन भई चहुं देस।।
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मोहे अपने ही रंग में रंग दे रंगीले
तो तू साहेब मेरा महबूब-ए-इलाही
मोहे अपने ही रंग में रंग दे रंगीले।।
हमरी चदरिया पिया की पगरिया,
वो तो दोनों बसंती रंग दे, रंगीले।
तो तू साहेब मेरा महबूब-ए-इलाही,
मोहे अपने ही रंग में रंग दे रंगीले।।
जो तू माँगे रंग की रंगाई,
मेरा जोबन गिरवी रख ले, रंगीले।
तो तू साहेब मेरा महबूब-ए-इलाही,
मोहे अपने ही रंग में रंग दे रंगीले।।
आन परी दरबार तिहारे,
मिरी लाज-शरम सब रख ले, रंगीले
तो तू साहेब मेरा महबूब-ए-इलाही
मोहे अपने ही रंग में रंग दे रंगीले।।
'निजामुद्दीन-औलिया' हैं पीर मेरो
प्रेम पीत का संग दे।
तो तू साहेब मेरा महबूब-ए-इलाही,
मोहे अपने ही रंग में रंग दे रंगीले।।
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शब्द रचना: अमीर खुसरो
रागबद्ध एवं स्वर: कौशल पवैया
डायरी: 17, पृष्ठ: 333
दिनाँक : 5 मार्च 2026
प्रातः काल, नोयडा
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