माँ शीतला का संपूर्ण मंत्र
Автор: Mantra - Tantra - Yantra ( मंत्र - तंत्र - यंत्र )
Загружено: 2026-03-10
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जब सूर्य का ताप धरती को जलाने लगता है, जब रोग और ज्वर शरीर को घेर लेते हैं, तब एक ही माँ की पुकार होती है — माँ शीतला। होली के बाद आने वाली सप्तमी को यह पावन पर्व मनाया जाता है। माँ शीतला — जो ठंडक देती हैं, जो रोग हरती हैं, जो अपने भक्तों को समस्त कष्टों से मुक्त करती हैं।
माँ शीतला का स्वरूप अत्यंत दिव्य और कल्याणकारी है। वे गधे पर सवार हैं, हाथ में कलश, झाड़ू और नीम की डाली लेकर आती हैं। जहाँ माँ की नजर पड़ती है, वहाँ से रोग, शोक और संताप भाग जाते हैं।
इस दिन व्रत रखा जाता है, बासी भोजन का भोग लगाया जाता है, और माँ से प्रार्थना की जाती है कि घर में कोई बीमार न पड़े, बच्चों पर उनकी कृपा बनी रहे। माँ शीतला चेचक, खसरा, और समस्त चर्म रोगों की देवी हैं। जो सच्चे मन से इनका आशीर्वाद माँगता है, माँ उसे कभी निराश नहीं करतीं।
जाप नहीं कर सकते तो यह मंत्र मोबाइल पर लगाकर छोड़ दें। माँ शीतला आपके घर में शीतलता, स्वास्थ्य और सुख लेकर आएंगी।
यह संपूर्ण शीतला मंत्र मैं आप सभी के लिए जाप करके दे रहा हूं कृपया इसे प्रतिदिन सुने और लाभ लें चैनल को शेयर करें सब्सक्राइब करें इसी गुरु दक्षिणा की हम आपसे आशा करते हैं धन्यवाद
आदेश आदेश।
सम्पूर्ण शीतला मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः।
वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्।
मार्जनीकलशोपेतां शूर्पालंकृतमस्तकाम्।।
शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता।
शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः।।
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