ycliper

Популярное

Музыка Кино и Анимация Автомобили Животные Спорт Путешествия Игры Юмор

Интересные видео

2025 Сериалы Трейлеры Новости Как сделать Видеоуроки Diy своими руками

Топ запросов

смотреть а4 schoolboy runaway турецкий сериал смотреть мультфильмы эдисон
Скачать

220.द्रव्य का प्रदेशवत्व और अप्रदेशवत्वरूप विशेष गाथा-135 || Himanshu Jain

Автор: Mumukshu Org

Загружено: 2026-02-28

Просмотров: 6

Описание: #himanshujain
#mumukshupathshala
#प्रवचनसारजी

तत्त्वप्रदीपिका गाथा क्र. 133
अब, शेष अमूर्त द्रव्यों के गुण कहते हैं:-

आगासस्सवगाहो धम्मद्दव्वस्स गमणहेदुत्तं धम्मेदरदव्वस्स दु गुणो पुणो ठाणकारणदा ।।143।।

कालस्स वट्टणा से गुणोवओगो त्ति अप्पणो भणिदो ।।134।।
णेया संखेवादो गुणा हि मुत्तिप्पहीणाणं

नभ का गुण अवकाश और, धर्मास्तिकाय का गति-हेतुत्व । स्थितिरूप परिणमन-कारण, है अधर्मद्रव्य का गुण ।।।३२।।
वर्तन-हेतु काल का गुण उपयोग कहा है चेत 394/761 मूर्तिहीन सब द्रव्यों के गुण इस प्रकार संक्षेप करु ।।124

तात्पर्यवृत्ति गाथा क्र. 143-144 का अनुवाद :-
उत्थानिका :- अब, आकाशादि अमूर्त द्रव्यों के विशेष गुणों का प्रतिपादन करते हैं -
तात्पर्यवृत्ति :- (आगासस्सवगाहो) आकाश द्रव्य का अवगाहहेतुपना, (धम्मद्दव्वस्स गमणहेदुत्तं) धर्म द्रव्य का गमनहेतुपना (धम्मेदरदव्वस्स दु गुणो पुणो ठाणकारणदा) और धर्मेतर द्रव्य अर्थात् अधर्मद्रव्य का स्थितिहेतुपना गुण है। इसप्रकार प्रथम गाथा पूर्ण हुई ।

(कालस्स वट्टणा से) कालद्रव्य का वर्तना गुण है, (गुणोवओगो त्ति अप्पणो भणिदो) ज्ञानोपयोग तथा दर्शनोपयोग ये दोनों आत्मा के गुण कहे हैं। (णेया संखेवादो गुणा हि मुत्तिप्पहीणाणं) इसप्रकार संक्षेप में अमूर्तद्रव्यों के गुण जानना चाहिए ।

वह इसप्रकार है- समस्त द्रव्यों के साधारण (समान रूप से) अवगाहन हेतुपने रूप विशेष गुणपने के कारण ही, अन्य द्रव्यों के असम्भव होने से (नहीं पाये जाने से) आकाश का निश्चय होता है ।

गति रूप परिणत समस्त जीव तथा पुगलों के एक समय में साधारण (समान रूप से) गमन हेतुपने रूप विशेषगुणपने के कारण ही, अन्य द्रव्यों के असम्भव होने से (नहीं पाये जाने से) धर्मद्रव्य का निश्चय होता है।
और उसीप्रकार स्थितिरूप परिणत समस्त जीव तथा पुगलों के एक समय में साधारण-(समानरूप से) स्थिति हेतुपने रूप विशेषगुण होने के कारण ही, अन्य द्रव्यों के असम्भव होने से (नहीं पाये जाने से) अधर्मद्रव्य का निश्चय होता है।

सभी द्रव्यों में एक साथ पर्याय के परिणमन हेतुपने रूप से विशेष गुणपने के ही कारण जो अन्यद्रव्यों के असम्भव होने से (नहीं पाये जाने से) कालद्रव्य का निश्चय होता है।

सभी जीवद्रव्य में साधारण सम्पूर्ण निर्मल केवलज्ञान तथा केवलदर्शन दोनों विशेष गुणपने ही के कारण जो अन्य अचेतन पाँच द्रव्यों के असंभव होने से (नहीं पाये जाने से) शुद्धबुद्ध एक स्वभावी परमात्मद्रव्य का निश्चय होता है।

यहाँ यह अर्थ है- यद्यपि पाँच द्रव्य जीव का उपकार करते हैं तथापि वे दुःख के कारण ही हैं ऐसा जानकर, अक्षय अनन्त सुख आदि के कारणरूप विशुद्ध ज्ञानोपयोग तथा दर्शनोपयोग स्वभावी परमात्मद्रव्य है, उसी का मन से ध्यान, वचनों से कथन और काया से उसके ही साधक अनुष्ठान को करना चाहिए ।।143-144।।

इसप्रकार किस द्रव्य के कौन विशेष गुण होते हैं ऐसे कथन रूप से तीसरे स्थल में तीन गाथाएँ पूर्ण हुईं ।

तत्त्वप्रदीपिका गाथा क्र. 135
अब, द्रव्य का प्रदेशवत्व और अप्रदेशवत्वरूप विशेष (भेद) बतलाते हैं:-

जीवा पोग्गलकाया धम्माऽधम्मा पुणो य आगासं ।।135।।
सपदेसेहिं असंखा णत्थि पदेस त्ति कालस्स ।।145।।

जीव और पुद्गल द्रव्यों के, धर्म अधर्म तथा नभ के ।
हैं अनेक प्रदेश किन्तु, नहिं हैं प्रदेश कालाणु के ।।135।।

अन्वयार्थ :- (जीवाः) जीव (पुद्रलकायाः) पुद्गलकाय, (धर्माधर्मी) धर्म, अधर्म (पुनः च) और(आकाशं) आकाश (स्वप्रदेशों की अपेक्षा से (असंख्याताः) असंख्यात अर्थात् अनेक हैं: (कालस्य) काल के (प्रदेशाः इति) प्रदेश (न सन्ति) नहीं हैं।


टीका :- जीव, पुद्गल, धर्म, अधर्म, और आकाश अनेक प्रदेशवाले होने से प्रदेशवान् हैं। कालाणु प्रदेशमात्र (एकप्रदेशी) होने से अप्रदेशी है।

(उपरोक्त बात को स्पष्ट करते हैं:-) संकोच विस्तार के होने पर भी जीव लोकाकाशतुल्य असंख्य प्रदेशों को नहीं छोड़ता, इसलिये वह प्रदेशवान है; पुद्गल, यद्यपि द्रव्य अपेक्षा से प्रदेशमात्र (एक प्रदेशी) होने से अप्रदेशी है, तथापि दो प्रदेशों से लेकर संख्यात, असंख्यात और अनन्तप्रदेशोंवाली पर्यायों की अपेक्षा से अनिश्चित प्रदेशवाला होने से प्रदेशवान् है; सकल लोकव्यापी असंख्य प्रदेशों के प्रस्ताररूप (विस्ताररूप) होने से धर्म प्रदेशवान् है, सकल लोक-व्यापी असंख्य प्रदेशों के विस्ताररूप होने से अधर्म भी प्रदेशवान् है, और सर्वव्यापी अनन्तप्रदेशों के विस्ताररूप होने से आकाश प्रदेशवान् है। कालाणु तो द्रव्यतः प्रदेशमात्र होने से और पर्यायतः परस्पर संपर्क न होने से अप्रदेशी ही है। इसलिये कालद्रव्य अप्रदेशी है और शेष द्रव्य प्रदेशवान् हैं।









.....

Не удается загрузить Youtube-плеер. Проверьте блокировку Youtube в вашей сети.
Повторяем попытку...
220.द्रव्य का प्रदेशवत्व और अप्रदेशवत्वरूप विशेष गाथा-135 || Himanshu Jain

Поделиться в:

Доступные форматы для скачивания:

Скачать видео

  • Информация по загрузке:

Скачать аудио

Похожие видео

47.बहनश्री के वचनामृत बोल-41(ii) || Himanshu Jain

47.बहनश्री के वचनामृत बोल-41(ii) || Himanshu Jain

Беседа Eyeway с Таней Натан

Беседа Eyeway с Таней Натан

27 Feb 2026 | 07:00 PM | Evening Sahajayoga Meditation | Sahaja Yoga | Pratishthan Pune

27 Feb 2026 | 07:00 PM | Evening Sahajayoga Meditation | Sahaja Yoga | Pratishthan Pune

"Математика и законы природы" Сергей Попов

Геополимерные решения и жидкое стекло | для метакаолина, золы, шлака, строительного раствора и бе...

Геополимерные решения и жидкое стекло | для метакаолина, золы, шлака, строительного раствора и бе...

JEDYNY TAKI WYWIAD! LINDA KLIMOVICOVA GOŚCINIĄ TRZECIEGO SERWISU | WIELKI SZLEM #1

JEDYNY TAKI WYWIAD! LINDA KLIMOVICOVA GOŚCINIĄ TRZECIEGO SERWISU | WIELKI SZLEM #1

Relaxing Chillout Music – Café del Mar Inspired Ibiza Vibes 🌅 24/7 Sunset Lounge Radio

Relaxing Chillout Music – Café del Mar Inspired Ibiza Vibes 🌅 24/7 Sunset Lounge Radio

Reakcja rynków na eskalację na Bliskim Wschodzie: Ropa, złoto, akcje i reszta 02.03.2026

Reakcja rynków na eskalację na Bliskim Wschodzie: Ropa, złoto, akcje i reszta 02.03.2026

46.बहनश्री के वचनामृत बोल-40,41 || Himanshu Jain

46.बहनश्री के वचनामृत बोल-40,41 || Himanshu Jain

Війна проти Ірану: перші наслідки | Віталій Портников

Війна проти Ірану: перші наслідки | Віталій Портников

MasterChef India | New Season | चाय पत्ती से बने इस Desert ने किया सभी को Shock | Full Episode 11

MasterChef India | New Season | चाय पत्ती से बने इस Desert ने किया सभी को Shock | Full Episode 11

43.बहनश्री के वचनामृत बोल-39(v) || Himanshu Jain

43.बहनश्री के वचनामृत बोल-39(v) || Himanshu Jain

23 Jan 2026 | 07:00 PM | Evening Sahajayoga Meditation | Sahaja Yoga | Pratishthan Pune

23 Jan 2026 | 07:00 PM | Evening Sahajayoga Meditation | Sahaja Yoga | Pratishthan Pune

वेद्य-वेदक भाव का अभाव | समयसार - 216 || आचार्य कुन्दकुन्ददेव || Gajapantha (MH) || 2025-06-15

वेद्य-वेदक भाव का अभाव | समयसार - 216 || आचार्य कुन्दकुन्ददेव || Gajapantha (MH) || 2025-06-15

"Robią ludzi w konia”. Szara strefa rośnie, bezrobocie już 6%

Мы уже знаем, что делать! | урок 9, субботняя школа 28.02.2026 г.

Мы уже знаем, что делать! | урок 9, субботняя школа 28.02.2026 г.

मोहतरमा मैं आपको रोते हुए नहीं देख सकता, ले जाईये 7 करोड़ l KBC New Episode | Amitabh Bachchan

मोहतरमा मैं आपको रोते हुए नहीं देख सकता, ले जाईये 7 करोड़ l KBC New Episode | Amitabh Bachchan

बाल क्रीड़ा एवं पालना झूलना • जन्म कल्याणक (सायंकालीन सत्र) • मोक्ष के महानायक का आगमन • २७ फरवरी २६

बाल क्रीड़ा एवं पालना झूलना • जन्म कल्याणक (सायंकालीन सत्र) • मोक्ष के महानायक का आगमन • २७ फरवरी २६

14.मरण के बाद विग्रह गति में गमन छहों दिशाओं में होता है

14.मरण के बाद विग्रह गति में गमन छहों दिशाओं में होता है

The Best Yoga Podcast for Women of All Ages, 10-60 Years @Jairamyoga | Dr. Shikha Podcast - 74

The Best Yoga Podcast for Women of All Ages, 10-60 Years @Jairamyoga | Dr. Shikha Podcast - 74

© 2025 ycliper. Все права защищены.



  • Контакты
  • О нас
  • Политика конфиденциальности



Контакты для правообладателей: [email protected]