वृंदावन रस
Автор: Krishna ji Bhajan
Загружено: 2026-01-29
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राग: भक्ति / वृंदावन रस
ताल: कहरवा / दादरा
मुखड़ा (कोरस):
राधे–कृष्णा, राधे–कृष्णा,
प्रेम सुधा बरसाने वाले।
राधे–कृष्णा, राधे–कृष्णा,
मन के दीप जलाने वाले॥
अंतरा 1:
वृंदावन की कुंज गलियों में,
गूँजे मधुर मुरली की तान।
श्याम रंग में रंगी हुई है,
राधा रानी की मुस्कान॥
नैनों में है लाज भरी सी,
हाथों में है प्रेम विधान।
एक दूजे के बिन अधूरे,
राधा–मोहन एक ही जान॥
मुखड़ा:
राधे–कृष्णा, राधे–कृष्णा,
प्रेम सुधा बरसाने वाले…॥
अंतरा 2:
रास रचैया, नटवर नागर,
बंसी बजावे श्याम सुहाए।
ताल मिलाए राधा रानी,
चरणों में सारा जग झुक जाए॥
प्रेम की भाषा बोले दोनों,
मौन में भी संदेश समाए।
जहाँ-जहाँ हो नाम तुम्हारा,
वहाँ-वहाँ वैकुंठ उतर आए॥
मुखड़ा:
राधे–कृष्णा, राधे–कृष्णा,
मन के दीप जलाने वाले…॥
अंतरा 3:
राधा है भक्ति की सरिता,
कृष्ण प्रेम का गहरा सागर।
राधा बिना श्याम अधूरे,
श्याम बिना राधा निरंतर॥
साँस-साँस में नाम तुम्हारा,
जपते जाएँ आठों पहर।
जन्म-जन्म का बंधन टूटे,
जब मिल जाए तेरा दर॥
मुखड़ा:
राधे–कृष्णा, राधे–कृष्णा,
प्रेम सुधा बरसाने वाले…॥
अंतरा 4:
माखन चोर सिया मनमोहन,
लीला तेरी सबसे न्यारी।
राधा के संग खेलें होरी,
बरसे रंग, बरसे फुलवारी॥
दीन दुखी के तुम हो दाता,
करुणा तेरी जग से भारी।
जो भी आया शरण तुम्हारी,
झोली उसकी भर दी सारी॥
मुखड़ा:
राधे–कृष्णा, राधे–कृष्णा,
मन के दीप जलाने वाले…॥
अंतरा 5 (भावपूर्ण):
हे राधे! हे श्याम सुंदर!
इतनी कृपा हम पर करना।
भटके मन को चरणों में रख,
प्रेम भक्ति का दान भरना॥
नाम तुम्हारा हो अधरों पर,
आँखों में बस दर्शन रहना।
इस जीवन की हर एक डोरी,
राधा–कृष्ण के संग बँधना॥
समापन (धीमा):
राधे–कृष्णा, राधे–कृष्णा,
जीवन नैया पार लगाओ।
राधे–कृष्णा, राधे–कृष्णा,
अपने चरणों में बसाओ॥
🌼 राधे राधे 🌼
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