गए KOTGARI दर्शन करने
Автор: Rahul Joshi
Загружено: 2026-02-22
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Описание:
अल्मोड़ा से लगभग 8-10 किलोमीटर दूर स्थित चितई गोलू देवता मंदिर उत्तराखंड के सबसे प्रसिद्ध और पवित्र मंदिरों में से एक है। गोलू जी को न्याय का देवता (न्याय के देवता) माना जाता है, जो भक्तों की मन्नतें पूरी करते हैं। यहाँ भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी होने पर तांबे की घंटियाँ चढ़ाते हैं और स्टाम्प पेपर पर न्याय की गुहार लगाते हैं।
District Almora
District Almora
चितई गोलू देवता मंदिर की मुख्य बातें:
न्याय के देवता: मान्यता है कि गोलू देवता (गोलज्यू) शीघ्र न्याय प्रदान करते हैं, इसलिए उन्हें न्याय का देवता कहा जाता है।
हजारों घंटियाँ: मंदिर में पीतल/तांबे की लाखों घंटियाँ बंधी हुई हैं, जो यहाँ आने वाले भक्तों की आस्था को दर्शाती हैं।
ऐतिहासिक महत्व: इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में चंद वंश के एक सेनापति द्वारा करवाया गया था।
स्थान: यह मंदिर घने चीड़ और देवदार के जंगलों से घिरा हुआ है, जो जागेश्वर धाम के रास्ते में पड़ता है।
कैसे पहुँचें:
सड़क मार्ग: अल्मोड़ा से स्थानीय टैक्सी या बस द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है, जो लगभग 20-30 मिनट का समय लेती है।
रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम (लगभग 94 किमी) है।
हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर (लगभग 124 किमी) है। #viral #youtube #vlog #like #nature #newyear2026 #trending #explore #souravjoshivlogs #uttarakhand
कोटगाड़ी देवी मंदिर, पांखू
माँ कोकिला (कोटगाड़ी) देवी मंदिर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के पांखू क्षेत्र में स्थित एक अत्यंत प्राचीन और प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जिसे "न्याय की देवी" के रूप में पूजा जाता है। इसे कुमाऊं क्षेत्र में भगवती दुर्गा का एक शक्तिशाली रूप माना जाता है, जहाँ भक्त अपनी अनसुलझी समस्याओं और अन्यायों के समाधान के लिए अर्जी लगाते हैं, जो सदियों से विश्वास का केंद्र है।
मुख्य तथ्य और मान्यताएँ:
न्याय की देवी: माना जाता है कि जहाँ साधारण अदालतें चुप हो जाती हैं, वहाँ माँ कोटगाड़ी का दरबार न्याय करता है, जहाँ पाँच पीढ़ियों पुराने अन्याय के मामले भी सुलझाए गए हैं।
अर्जी/पत्र: भक्त अक्सर अपनी समस्याओं को स्टाम्प पेपर या कागजों पर लिखकर यहाँ अर्जी लगाते हैं, जिसे 'न्याय की देहरी' माना जाता है।
स्थान: यह मंदिर पांखू, बेरीनाग तहसील के अंतर्गत, कालीनाग पहाड़ी के नीचे स्थित है
इतिहास: माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण चंद वंश के शासनकाल में हुआ था
विशेषता: यहाँ के गर्भगृह के नीचे से एक अनवरत जलधारा बहती है, जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।
पूजा का समय: नवरात्रि और विशेष अवसरों पर, यहाँ विशेष पूजा और अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।
अन्य नाम: इन्हें माँ कोकिला, कोटगाड़ी देवी, और माँ भगवती के नाम से भी जाना जाता है।
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