'बनारस' पर सबसे बेहतरीन कविता... HINDI KAVITA | BANARAS | बनारस | केदारनाथ सिंह | Kedarnath Singh
Автор: सौरभ मिश्रा - SAURABH MISHRA
Загружено: 2020-10-18
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बनारस एक बार आया हूं
फिर से आने की इच्छा है
घाटों पर सोया हूं रात भर
फिर एक सुबह जगने की
इच्छा है....
बनारस को शहर के रूप में नहीं
मै संस्कृति के रूप जानता हूं
बनारस एक रस नीरस नहीं
मै सभ्यता के संगम के रूप में जानता हूं
जहां सब कुछ मिल एकरस हो जाता है
बहुत कुछ जानना बाकी है
बनारस अभी बहुत देखना बाकी है
बनारस जीना बाक़ी है....।
इसी कमी को मैंने अपने प्रिय कवि 'केदारनाथ सिंह' की कविता बनारस पढ़ते हुए, पूरी होते हुए पाया.... और एक रात में देखे बनारस को अपने भीतर जीवित होते पाया।
कुछ जान लेने कुछ अच्छा महसूस कर लेने पर हम भारतीयों की सहज प्रवृत्ति है बांटने की, सो मैं भी बांट रहा हूं आपके साथ.....बनारस।
सौरभ मिश्रा
[email protected]
#hindi #kavita #poetry
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