Iran Protests: Economic Crisis, Regime Opposition in Hindi
Автор: Alisha's Reels
Загружено: 2026-01-13
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Описание: :कोई भी लड़ाई तीन चीज़ों पर निर्भर है – जर, जोरू, और ज़मीन। ये बात मैंने एक बार किसी बड़े वरिष्ठ अधिकारी के मुंह से सुनी थी। उसके बाद जब मैंने हर लड़ाई को जाना, तो इसी दृष्टिकोण से देखा और परिणाम सच में इन्हीं तीन चीज़ों पर आधारित निकला। दुनिया में कोई भी बड़ी लड़ाई चल रही हो या फिर घर में छोटी-से-छोटी लड़ाई – हर लड़ाई का कारण दौलत (खुद को बड़ा दिखाना), औरत, और ज़मीन ही निकलेगा।अभी हाल ही में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलास मदुरो को बंदी बनाया। जनवरी 2026 में US ने बड़ा ऑपरेशन चलाया, मदुरो और उनकी पत्नी को कैराकास से पकड़ लिया, और न्यूयॉर्क ले आया। ट्रंप ने कहा – "हम वहाँ रहेंगे जब तक सही तरीके से सत्ता ट्रांसफर नहीं हो जाती।" मतलब क्या? जर दिखा दिया – ताकत से कब्ज़ा, और वेनेजुएला की ज़मीन और तेल पर अमेरिका की नज़र साफ हो गई।अब अमेरिका की नज़र ईरान के तेल पर है। ईरान दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों वाला देश है, लेकिन उसका तेल बिक नहीं पा रहा – सैंक्शन्स की वजह से। इसी वजह से ये लड़ाई चल रही है। याद होगा, जब इज़राइल और फिलिस्तीन की लड़ाई चल रही थी, इज़राइल ने जून 2025 में ईरान के न्यूक्लियर सेटअप को तबाह कर दिया। अमेरिका ने भी साथ दिया – नतांज़, फोर्डो, इस्फहान जैसे साइट्स पर हमले हुए। ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम आर्थिक रूप से टूट गया। तेल की कीमतें ईरान को वो नहीं मिलीं कि वो दुबारा सब कुछ ठीक कर सके। बल्कि तेल की भी कमी हो गई।इसी बीच ईरान में महंगाई इतनी बढ़ गई कि एक डॉलर ईरान के 14-15 लाख रियाल के बराबर आ गया (जनवरी 2026 में ब्लैक मार्केट रेट यही था)। लोग भूखे मर रहे थे, दुकानें बंद हो रही थीं। आखिरकार गुस्सा फूट पड़ा। तेहरान के पुराने ग्रैंड बाज़ार से शुरू हुआ – दुकानदारों ने दुकानें बंद कर दीं और सड़कों पर उतर आए। विरोध 100 से ज़्यादा शहरों में फैल गया – तेहरान, मशहद, इस्फहान, कुर्दिस्तान, बलूचिस्तान... पूरे 31 प्रांतों में।लोग अब सिर्फ महंगाई नहीं चिल्ला रहे – वो सीधे सुप्रीम लीडर अली खमेनेई के खिलाफ नारे लगा रहे हैं: "डेथ टू द डिक्टेटर", "खमेनेई मुरदाबाद"। पुराना लायन-सन वाला झंडा लहरा रहे हैं, जो शाह के ज़माने का है। यानी अब ये सिर्फ पैसे की लड़ाई नहीं – ज़मीन (देश) और सत्ता की लड़ाई बन गई है।सरकार ने क्या किया? इंटरनेट पूरी तरह बंद कर दिया – 8 जनवरी 2026 से फोन-इंटरनेट सब ब्लैकआउट। पुलिस, IRGC, बसिज ने गोली चलाई – आंसू गैस, लाइव बुलेट्स। ह्यूमन राइट्स ग्रुप्स कह रहे हैं – दर्जनों से सैकड़ों लोग मारे गए (बच्चे भी शामिल), हज़ारों घायल, 10 हज़ार से ज़्यादा गिरफ्तार। लेकिन लोग रुक नहीं रहे। रात-दिन सड़कों पर हैं।ये लड़ाई भी वही तीन चीज़ों पर टिकी है – जर (अमेरिका-इज़राइल की ताकत), जोरू (क्षेत्रीय प्रभाव खोना, जैसे हिज़्बुल्लाह कमज़ोर होना), और ज़मीन (तेल, न्यूक्लियर, और पूरा मुल्क)। अगर ये गुस्सा और बढ़ा, तो ईरान का रिजीम कभी इतना कमज़ोर नहीं दिखा था।दुनिया देख रही है – ट्रंप कह रहे हैं, "अगर ज़्यादा खून बहा तो अमेरिका मदद करेगा।" खमेनेई कह रहे हैं, "हम पीछे नहीं हटेंगे।" लेकिन सड़कों पर सच बोल रहा है – लोग अब बदलाव चाहते हैं।क्या लगता है आपको? ये लड़ाई कहाँ तक जाएगी?
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