IED विस्फोट की दर्दनाक कहानी। सुनकर रूह कांप जाएगी ।
Автор: News Aapka
Загружено: 2026-02-25
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जंगल की पगडंडी पर उस दिन सब कुछ सामान्य था।
10 फरवरी की सुबह सलाई चेरवा अपनी पत्नी के साथ रोज़ की तरह पत्ते तोड़ने जंगल गए थे। गरीब आदमी की जिंदगी में हर दिन संघर्ष होता है, और उस दिन भी वे सिर्फ दो वक्त की रोटी के लिए निकले थे।
तभी जंगल की शांति को चीरती एक भयानक आवाज गूंजी — IED विस्फोट।
कुछ ही देर में खबर फैल गई कि जय सिंह चेरवा उस विस्फोट में बुरी तरह घायल हो गए हैं। गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए दौड़ पड़े। सलाई चेरवा भी भीड़ में शामिल थे। उनके चेहरे पर डर कम, इंसानियत ज्यादा थी।
“चलो जल्दी… अभी सांस चल रही होगी,”
किसी ने कहा।
और सलाई बिना एक पल गंवाए आगे बढ़ गए।
उन्हें क्या पता था कि जंगल की मिट्टी में मौत अभी बाकी है।
ग्रामीण जब घायल जय सिंह तक पहुंचने की कोशिश कर ही रहे थे कि अचानक —
दूसरा धमाका।
धुएं का गुबार, चीखें, सन्नाटा… और उसी सन्नाटे में सलाई चेरवा की जिंदगी खत्म हो गई।
वो जो किसी की जान बचाने आए थे, खुद बारूदी साजिश का शिकार बन गए।
उजड़ गया एक और घर
गांव के किनारे लकड़ी और मिट्टी से बना उनका छोटा सा घर अब वीरान सा लगता है।
वहीं घर, जहां शाम को चूल्हा जलता था।
जहां थक कर लौटने पर पत्नी दरवाजे पर इंतजार करती थी।
अब उस घर में सन्नाटा है।
पत्नी की आंखें सूज चुकी हैं। वो कम बोलती है… शायद इसलिए कि शब्द भी अब उसका साथ छोड़ चुके हैं।
जिस हाथ ने उसका सहारा थामा था, वही हाथ अब हमेशा के लिए छूट गया।
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