ब्राहमणों का सबसे पहला अधिकार है पवित्रता ... | BK Mohini Didi | Baba Milan | Diamond Hall Class ||
Автор: Godlywood Studio
Загружено: 2023-02-19
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पवित्रता ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ श्रुंगार |
पवित्रता एक ऐसा शब्द हैं जो ..... सम्पूर्ण पवित्रता
इसको कहते है पवित्रता ...
कुमारी जीवन अर्थात महान पवित्र जीवन ...
पवित्रता
८५ – सबसे बड़े ते बड़ी महानता है पावन बनना ...
८६ – पवित्रता ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ श्रुंगार ...
८७ – ब्राह्मण जीवन का जियदान ही पवित्रता है ...
८८ – आपका स्वमान क्या है ?? .. में परम पवित्र आत्मा हूँ ...
८९ – सदा आपस की बधाई द्वरा रावन को विदाय दे देना है ...
९० – खुद सेफ रहो लेकिन दूसरों को सर्टिफिकेट फाइनल नही दो ...
९१ – सदा बापदादा के साथ होली मनाने वाले होली हंस बनो ...
९२ – जलाना ही मनाना और बनना है ...
९३ – पवित्रता की धारणा ही धर्म सत्ता है ...
९४ – पवित्रता की अति सूक्ष्म परिभाषा समझो ....
९५ - पवित्रता के सम्पूर्णता की परिभाषा है ----- सदा स्वयं में भी सुख शांति स्वरूप और दूसरों को भी सुख शांति की प्राप्ति का अनुभव करने वाले ..
९६ – मनसा पवित्रता की शक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण है ---- प्रकुर्ती का भी परिवर्तन ....
11 08 2016
पवित्रता
९७ – थोड़ी सी कमजोरी सदा के लिए धर्म और कर्म को छुड़ा देती है ...
९८ – पवित्रता ही स्वच्छता है ...
९९ – सदा माँ ब्रह्मा के वरदान और लोरी याद रखो ..
१०० - ब्रह्मा कुमार का अर्थ ही है --- पवित्र कुमार ...
१०१ – सैदेव हरेक नारी शरीरधारी आत्मा को शक्तिरूप, जगतमाता का रूप, देवी का रूप देखना ...
१०२ – चारों सब्जेक्ट द्वरा विद्धि और सिद्धि प्राप्त करें वाले परम पूज्य आत्मा बनो ...
१०३ – ब्राहमण जीवन का मुख्य आधार कहो, नवीनता कहो, अलौकिकता कहो, जीवन का श्रुन्गार कहो, वह है ही – पवित्रता ....
१०४ – श्रेष्ठ परिवार है तो सदा श्रेष्ठ द्रष्टी रखो, क्योंकि यह महापाप कभी प्राप्ति स्वरूप का अनुभव करा नही सकता ...
१०५ – जैसे नाम है बाल ब्रहमचारिणी, वैसे संकल्प भी ऐसा पवित्र हो ...
१०६ – आप एक एक होलीहंस की पवित्रता की झलक चलन से दिखाई दे ...
१०७ – सदा मस्तक पर तिन विशेष अधिकार की तिन लकीरधारी बनो ..
१०८ – अपने चरित्र के चित्र में तिन बातों को देखते रहो ..
12 08 2016
पवित्रता
१०९ – अपने में तिन विशेषताओं के साथ तिन लाइट की गति को भी देखो ...
११० – जब तक अपवित्रता को सम्पूर्ण समाप्त नही किया है तब तक पवित्रता का रंग चढ़ नही सकता ...
१११ – व्यक्ति वा व्यक्त भाव में प्राभावित होना, प्रभावित होना नही लेकिन बरबाद होना है ...
११२ – पवित्रता के भिन्न भिन्न रूपों को अच्छी तरह से जानो, स्वयं के प्रति कड़ी द्रष्टी रखो, चलाओ नही ...
११३ – अपने को ब्राह्मण कहता है, ब्राह्मण आत्मा पर व्यर्थ वा विकारी द्रष्टी, वुर्ती जाती है --- तो यह कुल कलंकित की बात है ...
११४ – कामजीत अर्थात हद की कामनाओं जीत ...
११५ – अभी सब का एक इच्छा मातरम अविधा का आवाज हो तब औरों की इच्छाएं पूर्ण कर सकेंगे ...
११६ – पांच तत्व और पांच विकार को दासी बनाने वाले प्रकुर्तीजीत और मायाजीत बनो ...
११७ – सबको पांच विकारों के सदा के लिए समाप्त करें का संकल्प करना --- यह अंतिम टुब्बी का महत्व है ...
११८ – चारों तरफ की आग मिटाने वाले शीतलता का वरदान देने वाले शीतला देवी बन जाओ ...
११९ – निर्भय रहो और अपने अनादी आदि स्वरूप में स्थित रहो ...
१२० – शीतल योगी बनो .... १२१ – पवित्रता हमारा जन्म सिद्धि अधिकार है ...
कुमारी जीवन अर्थात महान पवित्र जीवन ...
दिल, बुद्धि मन और तन की एकाग्रता |
ईश्वरीय नशे में रहने से होने वाले फायदे !
ईश्वरीय नशा बहुत बड़ी चीज़ है !
पुरुषार्थ में कोई न कोई नशा साथ में लेकर चलना हैं
क्या हम अपनी कमजोरियों की बलि चढ़ाएँगे !
प्रभु मिलन,अव्यक्त मिलन की अलौकिक विधि !
Baba Milan | GWS | 18 Feb 23
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