तू बहता जा पल पल कल कल झरने की तरह।
Автор: sadhunityanandgurukulam
Загружено: 2020-03-16
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गीतकार और गायक: साधु नित्यानंद
Lyrics:
तू बहता जा पल पल कल कल झरने की तरह।
तू बढ़ता जा पल पल कल कल नदियां की तरह।
तू उड़ता जा हर दम हर पल उकाब की तरह।
(1) चाहे कितनी भी घाटियां हों अनजानी।(अनजानी)
चाहे कैसी भी वादियाँ हों अनजान।(सुनसानी)
घनघोर घटायें हों कहीं भी वीरानी।
डरना नहीं, हटना नहीं (बहुत ही)
डरना नहीं, हटना नहीं
कल है (सबेरा)
(2) ये बहता झरना एक दिन सागर में मिल जायें।
जो रुके नहीं चलता ही चले वो मंजिल पायें।
ये बहती नदियां चट्टानों को काट गिरायें।
कोई भी मुसीबत राहें इनकी रोक न पायें।
रूकना नहीं, थमना नहीं
रूकना नहीं, थमना नहीं चाहे लाख हो पहरा।
लाख हो पहरा।
(3) चाहे पर्वत टले या पहाडि़यॉं क्यों न टल जाऐं
खुदा के बंदे, ऊकाब जैसे उंचे उड़ते जायें
बेखौफ उड़े (ये ऊकाब) पंछी आसमान को छूता जायें
बांट जोहते रब के बंदे हरदम नया बल पायें
थकना नहीं, गिरना नहीं
ये पल है सुनेहरा
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