काल का काल महाकाल, मसान होली भजन | Aggressive Mahakal Song 2026 | Har Har Mahadev
Автор: UPENDRA SINGH RAJPOOT OFFICIAL
Загружено: 2026-02-02
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Описание:
काल का काल महाकाल 🔥 मसान होली भजन| Aggressive Mahakal Song 2026 | Har Har Mahadev
शीषर्क-- महाकाल का विकराल रूप 🔥 मसान की राख में बम-बम |
Song Credits:
Lyrics: उपेन्द्र सिंह (Upendra Singh)
Music & Vocals: AI Generated (Suno AI)
Concept & Presentation: [ उपेन्द्र राजपूत]
विशेष आभार- अनुपम पाण्डेय भैया जी
Lyrics (बोल):-
अस्थि चुनी, भस्म सनी, नयनों में अंगार है,
मशान की इस राख से, 'महाकाल' का श्रृंगार है।
ना मृदंग, ना वीणा बाजे, यहाँ डमरू की कड़क है,
अघोरियों के कुंभ में, दुदुम्भी की धधक है।
"काल जिसका दास है, वो शून्यता के पास है,
मसान की हर राख में, बस शिव का ही वास है!
बम-बम... बम-बम... हर-हर!"
मशानों की धुनी में चमकता, 'कालाग्नि' सा रूप है,
अंग-अंग पे मलय नहीं, भस्म का ही ढ़ेर है।
अस्थि माला... भस्म चोला... डमरू का उन्माद है,
काशी के सन्नाटे में, आज सिर्फ शिव का नाद है।
"काल जिसका दास है, वो शून्यता के पास है,
मसान की हर राख में, बस शिव का ही वास है!
बम-बम... बम-बम... हर-हर!"
'रुद्र' की भीषण गर्जना में, थर-थर कांपे अंबर है,
वो आदि-अंत से परे खड़ा, वो अघोरी 'दिगंबर' है!
चिता की पावक जल उठी, और नाच उठा 'नटराज' है,
शवों की इस भरी सभा में, बस 'अविनाशी' का राज है।
"काल जिसका दास है, वो शून्यता के पास है,
मसान की हर राख में, बस शिव का ही वास है!
बम-बम... बम-बम... हर-हर!"
'अंधक-मर्दन' रूप धरा, वीरभद्र क्रोध से जागे है।
देख शिव का विकराल रूप, खुद काल भी थर-थर भागे है।
'व्योमकेश' की जटा खुली, तो थिरक उठा सारा संसार,
चिता-भस्म की होली में, मगन है मेरा महाकाल।
"काल जिसका दास है, वो शून्यता के पास है,
मसान की हर राख में, बस शिव का ही वास है!
बम-बम... बम-बम... हर-हर!"
मरघट की मिट्टी में मिल जा, मसान की राख में खिल जा,
तू काशी का ही अंश है, चल विश्वनाथ से मिल जा!
उड़ाओ राख, बजाओ डमरू, 'बम-बम' की हुंकार करो,
मशान की इस होली में, खुद को शिव स्वीकार करो!
"काल जिसका दास है, वो शून्यता के पास है,
मसान की हर राख में, बस शिव का ही वास है!
बम-बम... बम-बम... हर-हर!"
"तू भी राख, मैं भी राख, ये सारा जगत ही राख है,
मिटा दे अपनी हस्ती को, शिव ही तो बेबाक है!
जब सब सोयेंगे महलों में, तू मरघट में मुस्काएगा,
तू शिव का है, तू शिव का था, तू शिव में ही मिल जाएगा!"
बम-बम... बम-बम... हर-हर!"बम-बम... बम-बम... हर-हर!"
--उपेन्द्र सिंह ✍️
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