Rural marketing// Socio-Cultural- Economic Factors// Environmental Factors // class 6
Автор: Study Temper
Загружено: 2025-12-27
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Rural marketing// Socio- Cultural- Economic Factors// Environment Factors// class 6
ग्रामीण मार्केटिंग (Rural Marketing) में सोशियो-कल्चरल, इकोनॉमिक और एनवायरनमेंटल फैक्टर्स बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नीचे इन कारकों का विस्तृत विवरण दिया गया है
ग्रामीण मार्केटिंग वातावरण (Rural Marketing Environment)
ग्रामीण बाजारों को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक इस प्रकार हैं:
1. सोशियो-कल्चरल फैक्टर्स (Socio-Cultural Factors)
यह कारक ग्रामीण उपभोक्ताओं की पसंद और व्यवहार को आकार देते हैं:
• परंपरा और संस्कृति: ग्रामीण जीवन रीति-रिवाजों और त्योहारों से गहराई से जुड़ा होता है। दिवाली, पोंगल और बैसाखी जैसे त्योहारों के दौरान खरीदारी (जैसे सोना और कपड़े) बढ़ जाती है।
• भाषा और संचार: भारत में अनेक भाषाएँ हैं। ब्रांडिंग और विज्ञापन के लिए क्षेत्रीय भाषा का उपयोग करना विश्वास बनाने के लिए आवश्यक है।
• ओपिनियन लीडर्स का प्रभाव: गाँव के सरपंच, स्कूल शिक्षक और स्थानीय डॉक्टर ग्रामीण लोगों के खरीदारी के निर्णयों को बहुत प्रभावित करते हैं।
• संयुक्त परिवार प्रणाली: ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े परिवार होते हैं, इसलिए वहां 'बल्क परचेजिंग' (थोक खरीदारी) को प्राथमिकता दी जाती है।
2. इकोनॉमिक फैक्टर्स (Economic Factors) [06:39]
यह कारक ग्राहकों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) को निर्धारित करते हैं:
• आय का स्तर: ग्रामीण आय मुख्य रूप से खेती पर निर्भर करती है और यह 'सीजनल' (मौसमी) होती है। फसल कटाई के बाद उनके पास खर्च करने के लिए अधिक पैसा होता है।
• प्राइस सेंसिटिविटी: ग्रामीण उपभोक्ता मूल्य के प्रति बहुत सचेत होते हैं। 1 या 2 रुपये का अंतर भी उनके निर्णय को बदल सकता है।
• सरकारी योजनाएं: 'मनरेगा' जैसी योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी का प्रवाह बढ़ता है, जिससे उपभोग क्षमता बढ़ती है।
3. टेक्नोलॉजिकल फैक्टर्स (Technological Factors)
तकनीक ग्रामीण भारत को तेजी से बदल रही है:
• इंटरनेट और मोबाइल: सस्ते डेटा प्लान के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्टफोन और इंटरनेट का उपयोग बढ़ा है, जिससे ई-कॉमर्स (Flipkart/Amazon) की पहुंच बढ़ी है।
• डिजिटल पेमेंट: UPI और आधार-आधारित भुगतान प्रणाली अब गाँवों में भी प्रचलित हो रही है।
• एग्रीटेक: किसान अब खेती और मौसम की जानकारी के लिए मोबाइल ऐप्स का उपयोग कर रहे हैं।
4. एनवायरनमेंटल और अन्य फैक्टर्स (Environmental & Other Factors)
• इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियां: खराब सड़कें, बिजली की कमी और कोल्ड स्टोरेज की सीमित सुविधा रूरल मार्केटिंग के लिए बड़ी बाधाएं हैं।
• भौगोलिक स्थिति: गाँव बिखरे हुए होते हैं, जिससे 'लास्ट माइल डिलीवरी' (अंतिम छोर तक पहुंच) चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
• राजनीतिक और कानूनी: सब्सिडी, GST और कृषि ऋण माफी जैसे कारक मांग को प्रभावित करते हैं।
निष्कर्ष: ग्रामीण बाजार में सफल होने के लिए मार्केटर्स को स्थानीय संस्कृति को समझना, क्षेत्रीय भाषा का उपयोग करना और डिजिटल तकनीक का लाभ उठाना आवश्यक है।
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