अष्टावक्र ऋषि की अद्भुत कथा | टेढ़ा शरीर, सीधा ब्रह्मज्ञान | Ashtavakra Rishi Story
Автор: Adhyatmik Vaani
Загружено: 2026-01-03
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अष्टावक्र ऋषि की अद्भुत कथा | टेढ़ा शरीर, सीधा ब्रह्मज्ञान | Ashtavakra Rishi Story
📝 Description (Engaging + SEO Optimized)
यह कथा है अष्टावक्र की —
एक ऐसे बालक की, जिसका शरीर जन्म से ही आठ स्थानों से टेढ़ा था,
लेकिन जिसकी चेतना सीधी, निर्भीक और ब्रह्मज्ञान से परिपूर्ण थी।
गर्भ में वेदों का ज्ञान,
पिता कहोड़ ऋषि का अपमान और जल में डुबोया जाना,
राजा राजा जनक की सभा में बालक अष्टावक्र का निर्भीक प्रवेश,
वंदिन से अद्वैत ब्रह्मज्ञान पर शास्त्रार्थ,
और अंत में अष्टावक्र गीता का जन्म —
यह कथा केवल इतिहास नहीं,
यह अहंकार को तोड़ने वाली चेतना है।
यह कहानी सिखाती है कि
शरीर पहचान नहीं होता,
आत्मा ही सत्य है।
📿 यह वीडियो/कहानी उन सभी के लिए है
जो ज्ञान, आत्मबोध और मोक्ष के अर्थ को समझना चाहते हैं।
⚠️ Disclaimer
यह कथा भारतीय पौराणिक ग्रंथों, उपनिषदिक परंपरा और लोक-मान्यताओं पर आधारित है।
कहानी को रोचक और प्रभावशाली बनाने के लिए कुछ संवादों और घटनाओं का रचनात्मक रूपांतरण किया गया है।
इसका उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं, बल्कि
आध्यात्मिक ज्ञान और दर्शन को सरल रूप में प्रस्तुत करना है।
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यह सामग्री केवल शैक्षणिक और आध्यात्मिक उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।
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