भिक्षुणी 'पटाचारा' की कहानी (थेरीगाथा)The story of the bhikshuni'Patachara'(Theri gatha)Anil Golait.
Автор: True Mindset
Загружено: 2021-03-06
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एक ऐसे लड़की की कहानी जिसके 'पानी के तूफान'के कारण, पती, बच्चे, माता-पिताऔर भाई इस दुनियां को छोड़कर चले गए, उसके जीवन मे ऐसे विपरीत में समय में,तथागत के वचन से उसे शांति मिली, वह होश में आयी, और धम्म में दीक्षित होकर एक श्रेष्ठ अरहन्त, भिक्षुणी बनी,और उसने धम्म का प्रचार करते हुए, अपना जीवन धम्म के रास्तेपर चलकर व्यतित किया, खुदको दुःख से मुक्त करते हुए, कहि लोगों के हित सुख और शांति के लिए वे कार्य करने लगी।
अपने उद्गार में वे कहती है, मैं शील सम्पन्न हूँ, अपने शास्था के शासन को पूर्ण करनेवाली, अचंचल और विनित हूँ।मेरे अंदर से तृष्णा रूपी शल्य के समान दुःख का तीर निकल गया है,मेरा चित्त शुद्ध हो गया है।
यह भिक्षुणी पटाचारा की कहानी है,जो त्रिपिटक के थेरीगाथा में विस्तृत वर्णन कि गई है।
आपका मंगल हो।
नमो बुद्धाय।
नमो धम्माय।
नमो संघाय।
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