BHRIGU SAMHITA/यह उपाय हर लेंगे कष्ट, चमका देंगे भाग्य
Автор: Dharm Darpan
Загружено: 2022-03-12
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ज्योतिष शास्त्र के महान ज्ञाता और प्रसिद्ध ग्रंथ भृगु संहिता के रचयिता महर्षि भृगु को ब्रह्मा जी का मानस पुत्र माना जाता है। भृगु जी ने भृगु संहिता नामक ज्योतिष शास्त्र का जो महान ग्रंथ रचा है उसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि इसमें संसार के हर व्यक्ति की कुंडली विद्यमान है। कोई भी इसमें अपनी कुंडली और अपने भविष्य के बारे में जान सकता है। हम आपको भृगु संहिता के ऐसा उपाय बताने जा रहे हैं जिससे आपके कष्ट तो दूर होंगे ही भाग्योदय भी होगा या कह सकते हैं कि इससे भाग्य चमक जायेगा। ऐसी मान्यता है कि मानव इस जन्म में जो क।ट भोगता है वह उसके पूर्व जन्म में किये गये किसी पाप या अन्याय का ही परिणाम होते हैं। लोग, शनि, मंगल, राहु आदि की दशाओं से पीडित रहते हैं। इनसे छुटकारा पाने के लिए कई तरह के उपाय, पूजापाठ, व्रत, पूजा, दान आदि उपाय या उपचार भृगु संहिता में बताये गये हैं। मंगल दोष, शनि की साढ़े साती आदि से मुक्ति पाने के उपाय भी इसमें बताये गये हैं।
यह मंत्र पूर्व जन्म के दोष तो दूर करता ही है और धन प्रदान करता है, पुत्र सुख देता है और मनोकामना की पूर्ति करता है। मंत्र इस प्रकार है-ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं आं शं शंकराय सकल जन्मान्तरार्जित पाप विध्वंशनाय श्रीमते आयुः प्रदाय धनदाय, पुत्र दारादि सौख्य प्रदाय महेश्वराय ते नमः
कष्टं घोरभयं वारय वारय पूर्णायुः वितर वितर मध्ये मा खंडितं कुरू कुरू सर्वान कामान् पूरय पूरय शं आं क्लीं हलीं ऐं ऊँ'
इस मंत्र का प्रतिदिन सौ बार जाप करना चाहिए।
आवश्यक नहीं कि मनुष्य की कुंडली के सभी ग्रह सदा अनुकूल ही रहें। यह ग्रह कभी-कभी वक्री भी हो जाते हैं तब व्यक्ति को किसी ना किसी तरह के कष्ट का सामना करना पड़ता है। किस ग्रह को कैसे शांत किया जाये अब यह भी जान लीजिए।
सूर्य ग्रह को शांत और अनुकूल करने के लिए माणिक्य, लाल वस्त्र, गेहूं, लाल फूल, गुड़ और गाय का दान करना उत्तम होता है।
चंद्र ग्रह यदि अनुकूल नहीं हैं तो उसक शांति के लिए सफेद रंग के वस्त्रों का दान, चावल का दान, जल से भरे घड़े, शंख, चांदी की वस्तु, मोती और कपूर का दान करना उपकारी होता है।
मंगल ग्रह को आप लाल मसूर की दाल, लाल रंग के वस्त्र, सोना, गेहूं आदि का दान देकर शांत कर सकते हैं।
बुध ग्रह की शांति के लिए सोना, घी, नीले वस्त्र का दान फलदायी होता है।
गुरु अर्थात बृहस्पति ग्रह की शांति के लिए पीले रंग का अनाज, पीले रंग के वस्त्र, हल्दी, स्वर्ण, नमक, पुखराज का दान बहुत लाभकारी होता है और यह कई कष्टों से मुक्ति दिला सकता है।
शुक्र ग्रह की शांति के लिए चावल का दान, घी, सुगंन्धित वस्तुओं का दान, गाय, अनेक रंगीन वस्त्र भी दान किये जा सकते हैं। यह ध्यान रहे कि सफेद रंग का पशु ही दान किया जाये।
शनि ग्रह की शांति के लिए लोहे की वस्तुएं, नीलम रत्न का दान सकते हैं। इसके लिए काले तिलों का दान, काले रंग के वस्त्र भी दान कर सकते हैं. नीले रंग का कम्बल, काले रंग की गाय या भैंस भी दान दे सकते हैं। उड़द की दाल भी दान की जाती है।
राहु ग्रह की शांति के लिए तिल का तेल, काले रंग के वस्त्र, स्वर्ण, गोमेद, कम्बल आदि का दान करना उपकारी होता है।
केतु की शांति के लिए कस्तूरी का दान बहुत अच्छा होता है। कंबल, तिल के तेल का दान अनुकूल होता है।
ये हैं कुंडली के कुछ खास योग
1. अगर किसी व्यक्ति की कुंडली के दूसरे भाव में कोई शुभ ग्रह हो या शुभ ग्रहों की दृष्टि इस भाव पर हो तो उसे धन प्राप्त होता है।
2. किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध ग्रह द्वितीय भाव में हो और उस पर चंद्रमा की दृष्टि पड़ रही हो तो व्यक्ति कड़ी मेहनत के बाद भी आसानी से अमीर नहीं बन पाता है।
3. जिस व्यक्ति की कुंडली के दूसरे भाव में चंद्रमा है, वह अपनी मेहनत से धनवान बनता है।
4. यदि द्वितीय भाव के चंद्र पर नीच के बुध की दृष्टि पड़ जाए तो उस व्यक्ति के परिवार का धन भी खत्म हो जाता है। अगर कुंडली में कोई शुभ योग न हो तो व्यक्ति गरीबी में जीता है।
5. यदि चंद्रमा अकेला हो और कोई भी ग्रह उससे द्वितीय या द्वादश न हो तो व्यक्ति आजीवन गरीब ही रहता है। ऐसे व्यक्ति को आजीवन अत्यधिक परिश्रम करना होता है, लेकिन वह अधिक पैसा नहीं प्राप्त कर पाता।
6. यदि दूसरे भाव में किसी पाप ग्रह की दृष्टि पड़ रही है तो व्यक्ति धनहीन होता है।
7. अगर सूर्य और बुध द्वितीय भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति के पास पैसा नहीं टिकता है। व्यक्ति कितनी मेहनत कर ले, पैसा जमा नहीं कर पाता है।
भृगु संहिता में भूत काल, भविष्य काल एवं वर्तमान काल की सही घटनाओं का विवरण है। उसमें ग्रहों की स्थिति के फलों के बारे में भी उल्लेख है। इसके अनुसार ग्रह जहां होते हैं कैसा फल देते हैं। जैसे कुंडली के दसवें घर में सूर्य, शनि, राहु, या मंगल हों जातक का पिता के साथ मतभेद होता है। उनके विचार मेल नहीं खाते। अगर सूर्य मकर और कुंभ राशि में हो तो वह व्यक्ति, अपने परिवार की योजनाओं, या कार्यों पर कायम ना रह कर अपना अलग रास्ता अपनाता है। ऐसे व्यक्ति को बहुत संघर्ष करने के बाद कहीं सफलता के दर्शन हो पाते हैं।
ऐसा जातक पिता के लिए कष्टकारक होता है। तृतीय भाव में मंगल, शनि, अथवा राहु होने पर जातक के भाईयों से संबंध अच्छे नहीं होते। धनु राशि का शुक्र होने पर जातक का वैवाहिक जीवन सुखद नहीं होता।
द्वितीय, अथवा अष्टम स्थान में गुरु हो तो जातक का मन एक जैसे कार्य में नहीं लगता। उसका लगाव व्यापार के प्रति अधिक रहता है।
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