जाते हो तुम वन को राघव || Ram Bhajan || Bhajnanandi Music TV || B 15
Автор: Bhajananandi Music TV
Загружено: 2026-02-08
Просмотров: 60
Описание:
🙏 जाते हो तुम वन को राघव | Ram Bhajan | Bhajnanandi Music TV 🙏
जब राघव वन को जाते हैं,
तो देह जाती है…
पर भक्ति का मन वहीं ठहर जाता है 💔✨
Ram bhajan sune man ko shant karne wala
aapko pasand jaroor ayyega kuch kami lage to bataye
jaroor koshish karunga aur behtar karne ki
यह करुण, भावपूर्ण राम भजन
विरह, त्याग और शुद्ध भक्ति का भाव लिए हुए है।
यदि राम नाम से आपका हृदय भीग जाता है,
तो यह भजन आपके लिए है 🙏
🎶 Sad Devotional Ram Bhajan
🎶 Vanvaas of Raghav – Virah Bhav
🎶 Pure Bhakti | Emotional Ram Song
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📺 Presented by:
Bhajnanandi Music TV
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Immerse yourself in the soothing sounds of bhagwat bhajans, devotional songs that touch the heart and soul. Our channel offers a unique blend of traditional and modern instrumentation.
Featuring:
-AI-created bhajans in Hindi
Calming instrumental arrangements and harmonies
Naam jaap
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Lyrics by: Amit niranjan
Music : Suno AI
Pictures: Flow AI
Editing in: I movie
Thubnail : Chatgpt + Keynote
Lyrics :
जाते हो तुम वन को राघव
पर इस मन से जाना नहीं
देखा तुम्हें भर भर आँखों से
पर ये दिल माना नहीं
जाते हो तुम वन को राघव
पर इस मन से जाना नहीं
देखा तुम्हें भर भर आँखों से
पर ये दिल माना नहीं
(जाते हो तुम वन को राघव) (अह, नहीं)
पर इस मन से जाना नहीं
(देखा तुम्हें भर भर आँखों से) (आह)
पर ये दिल माना नही
पितृ वचन की लाज निभाने,
छूटी अवध सुहानी।
राज तज कर वन पथ धारे,
धर्म बना राजधानी॥
रोया जन-जन, मौन दिशाएँ,
नभ भी शोक मनाए।
राम बिना यह नगरी सारी,
सूनी-सूनी जाए॥
जाते हो तुम वन को राघव
पर इस मन से जाना नहीं
देखा तुम्हें भर भर आँखों से
पर ये दिल माना नहीं
सीता संग वन-पथ कठिन,
लक्ष्मण धैर्य अपार।
काँटों में भी कमल खिले,
जहाँ पड़े प्रभु पग-धार॥
छाया भी ठहरी थम-सी,
वायु रुकी हरसाए।
राम चले तो वन-वन बोले,
“प्रभु फिर कब लौट आए?”॥
जाते हो तुम वन को राघव
पर इस मन से जाना नहीं
देखा तुम्हें भर भर आँखों से
पर ये दिल माना नहीं
(जाते हो तुम वन को राघव) (नहीं)
पर इस मन से जाना नहीं
(देखा तुम्हें भर भर आँखों से) (आह)
पर ये दिल माना नही
वन में रहो या राजभवन में,
राम हमारे प्राण।
विरह जले पर भक्ति बचे,
यही भक्त की जान॥
देह भले ही दूर चली जाए,
मन न जाए दूर।
राम बसे हर श्वास-श्वास में,
यही प्रेम का नूर॥
(जाते हो तुम वन को राघव)
(पर इस मन से जाना नहीं)
(देखा तुम्हें भर भर आँखों से)
(पर ये दिल माना नहीं)
जाते हो तुम वन को राघव
पर इस मन से जाना नहीं
देखा तुम्हें भर भर आँखों से
पर ये दिल माना नहीं
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