हिमाचल, उत्तराखंड के बाद अब दार्जिलिंग में भूस्खलन | Darjeeling landslide | Decode
Автор: DD News
Загружено: 2025-10-06
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हाल ही में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश के दौरान पहाड़ों को टूटते हुए देखा होगा, अब यही स्थिति दार्जिलिंग में हो रही है। रविवार यानी 5 अक्टूबर को बहुत तेज बारिश के बाद Landslide की वजह से दार्जिलिंग में अब तक 20 की मौतें हुई हैं और लगभग 100 लोग घायल हैं। दार्जिलिंग और आस-पास के इलाकों में पिछले 24 घंटे में 300 मिलीमीटर बारिश हुई है। जबकि वहां अक्टूबर के महीने में औसतन सिर्फ 121 मिलीमीटर बारिश होती है। यानी पूरे महीने में औसतन जितनी बारिश होती है उससे दो गुना ज्यादा बारिश सिर्फ 24 घंटे में हो गई। अचानक हुई इस बारिश से भूटान और सिक्किम से आने वाली नदियों में बहुत ज्यादा पानी आ गया। जिससे दार्जिलिंग में Landslide और पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में बाढ़ आ गई है।
सबसे पहले आप दार्जिलिंग से आई तस्वीरें और वहां के लोगों के बयान सुनिए, इसके बाद हम आपको इस तबाही की वजहें बताएंगे। दार्जिलिंग को Queen of Hills भी कहा जाता है। सबसे पहले आपको नक्शे पर दिखाते हैं कि दार्जिलिंग कहां पर है। तो ये पश्चिम बंगाल में रणनीतिक तौर पर भारत के सबसे महत्वपूर्ण इलाकों में एक चिकन नेक यानी सिलीगुड़ी कॉरीडोर पर मौजूद है। जो भारत के Mainland यानी मुख्य भूभाग को North East के 7 राज्यों से जोड़ता है। सिर्फ 22 किलोमीटर चौड़े इस कॉरीडोर पर बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और तिब्बत की सीमाएं मिलती हैं। अगर सिलीगुड़ी कॉरीडोर पर किसी तरह की रुकावट आ जाए तो North East के राज्य भारत से कट सकते हैं। और ये बहुत ही महत्वपूर्ण इलाका है। दार्जिलिंग में जो हुआ, उसे प्राकृतिक हादसा कहा जाता है, लेकिन असल में ये Man Made Disasters हैं। वर्ष 2023 में Indian Space Research Organisation ने Landslide पर एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें दार्जिलिंग को देश का 35वां सबसे ज्यादा खतरनाक इलाका बताया। यानी वहां प्राकृतिक आपदा का खतरा बहुत ज्यादा है। इस इलाके की लाल और चिकनी मिट्टी पहाड़ की ढलानों को मजबूती नहीं दे पाती और बारिश होते ही आसानी से बह जाती है। वहां की सरकार को Landslide रोकने के लिए कोशिशें और तैयारी करनी चाहिए थी। लेकिन आपदा प्रबंधन में लापरवाही हुई है, सुरक्षा के उपाय पर्याप्त नहीं थे। इसलिए चेतावनी के बावजूद दुर्घटना हो गई। हालांकि ये कोई पहला मौका नहीं है- दार्जिलिंग में पिछले 126 वर्षों में 7 बड़े Landslide हो चुके हैं। हाल के समय में Landslides की वजह हैं, दार्जिलिंग में हुए 4 बड़े बदलाव। पहला..पिछले 25 वर्षों में दार्जिलिंग की जनसंख्या 33 पर्सेंट बढ़ गई, जिसके बाद पहाड़ों पर तेज रफ्तार से घर बनाए गए और कमजोर ढलानों पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया। दूसरा..अब पहाड़ों पर तेज और अचानक आने वाली बारिश होती है, जिसकी वजह से Landslide का खतरा ज्यादा होता है। तीसरा..पहाड़ों पर नदियों और धाराओं के प्राकृतिक रास्तों पर नए इलाके बस गए हैं, जिससे उनका बहाव रुक गया और प्राकृतिक आपदा की आशंका बढ़ गई है। और चौथा..Hotels, Resorts, सड़कें और Hydro Power Projects का लगातार निर्माण पहाड़ों की बर्दाश्त करने की क्षमता से अधिक हो चुका है।
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