“माँ ने कहा—‘कल से ये घर हमारा!’… मैंने दरवाज़े पर वो कागज़ रख दिया जो सबको चुप करा गया”
Автор: दिल से बदला
Загружено: 2026-02-23
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Описание: नैना ने सालों की थकान, कंट्रोल और “परिवार के नाम पर” होने वाली आर्थिक खींचतान से निकलकर समुद्र के पास एक छोटा सा घर खरीदा—सिर्फ सुकून के लिए। लेकिन शांति शुरू होने से पहले ही माँ का फोन आया: “हम कल शिफ्ट हो रहे हैं… और गृह प्रवेश भी होगा।” अगले दिन रिश्तेदारों की भीड़, पूजा की थाली और पुराने दबाव के बीच नैना ने पहली बार सबके सामने अपनी ज़िंदगी के नियम लिखकर रख दिए। ये कहानी बदले की नहीं—सीमाओं की है। सम्मान की है। और उस पल की है जब एक बेटी “अच्छी” बनने के चक्कर में खुद को खोने से इंकार कर देती है।
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