श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी संपूर्ण चरित्र कथा🥰||Indresh ji maharaj||
Автор: shree ji ka bhakt
Загружено: 2025-09-09
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अपने चैनल 'Shree ji ka bhakt' पर श्री इंद्रेश जी महाराज द्वारा प्रस्तुत, यह वीडियो आपको श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी के दिव्य चरित्र की संपूर्ण कथा में डुबो देगा।
इस प्रेरक कथा में, [00:09] देववन (आज का देवबंद) के व्यास मिश्र जी और उनकी पत्नी तारा जी के जीवन को जानें, जहाँ संतानहीनता की पीड़ा से लेकर एक अद्भुत पुत्र रत्न की प्राप्ति तक का सफर वर्णित है। जब व्यास मिश्र जी के बड़े भाई, परम विरक्त नरसिंह आश्रम जी, उन्हें संतान की इच्छा त्यागने को कहते हैं, तब तारा मैया अपनी अटूट भक्ति और विश्वास से यह प्रश्न उठाती हैं कि क्या संतों का आशीर्वाद विधि के विधान को नहीं बदल सकता [03:50]।
इसी भावुक क्षण में, [05:05] ठाकुर जी स्वयं नरसिंह आश्रम जी के हृदय में प्रकट होकर आज्ञा देते हैं कि उनकी अधर की निजवंशी ही व्यास मिश्र जी के घर पुत्र रूप में प्रकट होगी। इस प्रकार, वैशाख शुक्ल एकादशी के पावन दिन, ब्रज मंडल के बाद गाँव में श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी का प्राकट्य होता है [15:46]।
महाप्रभु जी के बाल्यकाल से ही उनके अद्भुत गुण और राधा रानी के प्रति असीम प्रेम प्रकट होने लगते हैं। [18:31] उनका पहला शब्द 'श्री राधा' होता है, और वे अपने बाल सखाओं के साथ भी राधा-कृष्ण का विपरीत श्रृंगार करके उनकी लीलाओं का आनंद लेते हैं [20:16]। उनकी भक्ति इतनी गहरी थी कि एक बार अर्धरात्रि में जब उन्हें भूख लगी, तो [29:06] स्वयं श्यामा-श्याम ने अपने महाप्रसाद का भोग लगाकर उन्हें शांत किया।
इस कथा में यह भी बताया गया है कि कैसे श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी को [31:37] मानसी सेवा में ठाकुर जी से स्वयं आदेश मिला कि उनके भवन के पीछे एक कुएँ में उनका स्वरूप विराजमान है। बिना किसी संकोच के, महाप्रभु जी उस सूखे कुएँ में कूद पड़े और [34:10] श्री नवरंगी लाल जी को अपने हृदय से लगाकर ऊपर आए, जिससे वह सूखा कुआँ भी जल से भर गया।
बाद में, [38:06] किशोरी जी की आज्ञा से महाप्रभु जी वृंदावन के प्रकाश के लिए निकले, और चथावल गाँव में उन्हें आत्मदेव ब्राह्मण से श्री राधा वल्लभ लाल जी का प्रथम निधि स्वरूप प्राप्त हुआ [41:05]। इसके पश्चात्, महाप्रभु जी वृंदावन पधारे और [46:54] मदन टेरर नामक स्थान पर श्री राधा वल्लभ लाल जी को विराजमान कर कलयुग में वृंदावन के प्रथम उत्सव को मनाया।
यह कथा आपको भक्ति के विभिन्न आयामों से परिचित कराएगी और श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी के अनुपम जीवन से प्रेरणा देगी।
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