गायत्री की पूजा: आत्मशुद्धि और बुद्धि प्रखरता का दिव्य साधन........
Автор: Arunachala Ramana Spiritual
Загружено: 2026-02-20
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गायत्री देवी की पूजा : आत्मशुद्धि और बुद्धि प्रखरता का दिव्य साधन
गायत्री की पूजा भारतीय वैदिक परंपरा में आत्मशुद्धि और बुद्धि के जागरण का सर्वोच्च साधन मानी गई है। गायत्री देवी को वेदमाता कहा गया है, क्योंकि वे समस्त ज्ञान और प्रकाश की अधिष्ठात्री शक्ति हैं।
गायत्री मंत्र का जप मन, बुद्धि और चित्त को पवित्र करता है। यह मंत्र साधक के अंतःकरण में छिपे अज्ञान के अंधकार को दूर कर दिव्य प्रकाश का संचार करता है। नियमित रूप से श्रद्धा और एकाग्रता के साथ जप करने से विचार शुद्ध होते हैं, निर्णय क्षमता तीव्र होती है और विवेक जागृत होता है।
गायत्री उपासना केवल बाहरी पूजा नहीं, बल्कि आंतरिक साधना है। जब साधक प्रातः और सायं संध्या के समय शांत मन से मंत्रजप करता है, तो उसकी चेतना ऊर्ध्वगामी होती है। यह साधना क्रोध, लोभ, मोह जैसे दोषों को क्षीण कर आत्मबल को बढ़ाती है।
बुद्धि की प्रखरता के लिए गायत्री मंत्र अत्यंत प्रभावी माना गया है। यह स्मरण शक्ति, एकाग्रता और आध्यात्मिक जागृति को बढ़ाता है। विद्यार्थी, साधक और गृहस्थ—सभी के लिए यह मंत्र जीवन में संतुलन और सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।
अतः गायत्री की पूजा आत्मशुद्धि, मानसिक शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का दिव्य साधन है। जो साधक निष्ठा और विश्वास के साथ इस साधना को अपनाता है, उसके जीवन में प्रकाश, शांति और ज्ञान का संचार होता है।
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