NAJAF-E-HIND JOGIPURA|| जोगीपुरा ।। मौला अली की दरग़ाह
Автор: kashani T.v
Загружено: 2022-08-21
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ये है दरगाह ए आलिया नजफे हिंद जोगीपुरा...जो उत्तरप्रदेश के नजीबाबाद से कुछ दूरी पर बसा है...ये दरगाह काफी कदीमी है...जहां हजारों लाखों लोग मुरादों को लेकर यहां आते है...और शिफायाब होकर जाते है..माना जाते है कि मौला अली की दरगाह कि खासियत ये है कि यहां जो भी सवाली आता है अपने दामन को भरकर जाते है क्योकि यहां पर हर इंसान की सभी जायज मुरादे पूरी होती है...इसी लिये इसको हाजत रवा जमी भी कहते है...यहां हर दिन लोगों को डेरा रहता है...इस दर पर हर मजहबों मिल्लत का इंसान आता है...और मौला अली के दर पर अपना सर झुकाता है...इस दरगाह पर बहुत-बहुत दूर से लोग आते है और कयाम करते है..अपने दिलों में अली से कुछ पाने की चाहते रखते है जब उनके चाहते पूरी हो जाती है...तो नजराना अकीदत पेश करते है...मौला अली की दरगाह के ठीक सामने,शहज़ादी कोनेन , जनाबे फातिमा जहरा सलमामूनालह की दरगाह है...जिन्होंने बड़ी कमसिनी मे हजारों ग़म झेले और जल्द ही इस दुनिया से रुखसत हो गई दरगाह की नक्काशी हूबहू कर्बला के रोज़े की शक्ल नुमा है दरगाह के ठीक बीच इमाम हुसैन क दुखतर जनाबे सकीना का रौजा है जिनकी उम्र सिर्फ 5 बरस की थी जो ज़िंदान मे कैद होके अपने बाबा इमाम हुसैन को सुबह शाम याद करते करते दुनिया से रुखसत हो गई इनके रौज़े पर भी हाजते रवा होती है लोग मन्नतों के लिए लाल धागे रओजूए की जालियों पर बांध देते है वही इन तीनों रौज़े के आहते से कुछ दूरी पर गाजी अब्बास का परचम लहराता हुआ मिलेगा यानि हज़रत अब्बास as का रौजा भी बना हुआ है जहा लोगों को रूहानी शिफ़ा मिलती है ये वो गाजी अब्बास है जिन्होंने बिना जंग के ये साबित किया की दरिया पर कब्जा कैसे किया जाता है और आज भी दरिया पर अब्बास का परचम लहरता हुआ नज़र आता है
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