Durga Chalisa: Lyrics & Meaning | श्री दुर्गा चालीसा: अर्थ सहित (Powerful Divine Music)
Автор: SBBBM Mitra Mandal Bhakti
Загружено: 2026-03-18
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🙏 जय माता दी! इस वीडियो में श्री दुर्गा चालीसा का पाठ उनके गहरे अर्थ (Meaning) के साथ प्रस्तुत किया गया है।
✨ इस वीडियो की विशेषता: यह वीडियो AI तकनीक और रचनात्मक संपादन का एक संगम है। हमने Gemini (Visuals) और Suno AI Pro (Audio) का उपयोग करके एक आधार तैयार किया, जिसमें मैन्युअल रूप से:
बैकग्राउंड और लेयर्स में बदलाव किए गए।
ट्रांसपेरेंसी और मूविंग एलिमेंट्स (Motion Effects) जोड़े गए।
लिरिक्स को सटीक रूप से सिंक किया गया।
📖 श्री दुर्गा चालीसा का अर्थ (संक्षेप): माँ दुर्गा की यह चालीसा उनके नौ रूपों की महिमा और राक्षसों के संहार की कथा बताती है। यह भक्तों को शक्ति, शांति और सुरक्षा प्रदान करती है।
श्री दुर्गा चालीसा (हिन्दी अर्थ के साथ)
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥ (हे माँ दुर्गा, आप सभी को सुख प्रदान करने वाली और सभी दुखों को हरने वाली हैं। माँ अम्बे, आपको मेरा प्रणाम है।)
निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली उजियारी॥(आपका स्वरूप निराकार है और आपकी दिव्य ज्योति तीनों लोकों में प्रकाश फैला रही है।)
शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥(आपके मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित है, मुख विशाल है,आपकी आँखें लाल और भृकुटि विजय का प्रतीक हैं।)
रूप मातु को अधिक सुहावे। छवि देखत जन मन अति भावे॥(माँ आपका यह रूप अत्यंत सुंदर और सुखद है, जिसे देखकर भक्तों का मन हर्षित हो जाता है।)
तुम संसार शक्ति लय कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥(आपने ही इस संसार की शक्तियों को समेटा है और जीवों के पालन-पोषण के लिए अन्न और धन प्रदान किया है।)
अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥(आप ही अन्नपूर्णा रूप में जगत का पालन करती हैं और आप ही आदि शक्ति बाला सुन्दरी हैं।)
प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिव शंकर प्यारी॥(प्रलय के समय आप ही सब बुराइयों का नाश करती हैं और आप ही भगवान शिव की प्रिय माता गौरी हैं।)
शिव योगी तुम्हारे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥(भगवान शिव और सभी योगी आपका गुणगान करते हैं। ब्रह्मा और विष्णु जी भी आपका ध्यान धरते हैं।)
रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥(आपने ही सरस्वती का रूप धारण कर ऋषियों-मुनियों को श्रेष्ठ बुद्धि प्रदान की है।)
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़ के खम्बा॥(माँ अम्बे, आपने ही नरसिंह रूप धरकर खंभा फाड़कर अवतार लिया था।)
रक्षा कर प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥(आपने ही भक्त प्रह्लाद की रक्षा की और हिरण्यकश्यप (हिरण्याक्ष) का वध किया।)
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण करत पालाहीं॥ (आप ही लक्ष्मी रूप में इस जगत में, भगवान नारायण के साथ सृष्टि का पालन करती हैं।)
क्षीरसिंधु में करत विलासा। दयासिंधु दीजै मन आसा॥ (क्षीर सागर में निवास करने वाली दया की सागर माँ, मेरी मनोकामना पूर्ण करें।)
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥ (हिंगलाज में आप ही भवानी रूप में हैं, आपकी महिमा का वर्णन करना असंभव है।)
मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुखदाता॥ (मातंगी, धूमावती, भुवनेश्वरी और बगलामुखी रूप में आप ही सुख प्रदान करती हैं।)
श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्नभाल भव दुःख निवारिणी॥ (आप ही तारा और छिन्नमस्तिका रूप में संसार के दुखों का निवारण करती हैं।)
केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥ (सिंह की सवारी पर आप सुशोभित हैं और वीर हनुमान आपकी अगवानी करते हैं।)
कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजै॥ (आपके हाथों में खप्पर और तलवार है, जिसे देखकर स्वयं काल भी डर जाता है।)
सोहे अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला॥ (आपके अस्त्र और त्रिशूल शत्रुओं के हृदय में भय पैदा कर देते हैं।)
नगरकोट में तुम्हीं विराजत। तिहुँलोक में डंका बाजत॥ (नगरकोट (कांगड़ा) में आप ही विराजमान हैं, तीनों लोकों में आपकी ही धाक है।)
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे। रक्तबीज शंखन संहारे॥ (आपने ही शुम्भ-निशुम्भ और रक्तबीज जैसे भयानक राक्षसों का अंत किया।)
महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी॥ (जब अभिमानी महिषासुर के पापों से धरती व्याकुल हो उठी ..)
रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा॥ (तब आपने महाकाली का रूप धरकर उसकी सेना सहित उसका संहार किया।)
परी गाढ़ सन्तन पर जब जब। भई सहाय मातु तुम तब तब॥ (जब-जब संतों पर विपत्ति आई, हे माँ! आपने उनकी सहायता की।)
अमरपुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सब रहें अशोका॥ (आपकी कृपा से देवलोक और इंद्रलोक के सभी देवता शोक रहित रहते हैं।)
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥ (ज्वालाजी में आपकी ही अखंड ज्योति जलती है, जिसकी पूजा सभी नर-नारी करते हैं।)
प्रेम भक्ति से जो यश गावें। दुःख दारिद्र निकट न आवें॥ (जो भी प्रेम से आपका यश गाता है, उसके पास दुःख और दरिद्रता नहीं आती।)
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म मरण ते सौ छुटि जाई॥ (जो मन लगाकर आपका ध्यान करता है, वह जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है।)
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥ (योगी और ऋषि कहते हैं कि आपकी शक्ति के बिना योग और सिद्धि संभव नहीं है।)
शंकर आचारज तप कीनो। काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥ (शंकराचार्य जी ने कठिन तपस्या करके अपने काम, क्रोध, लोभ और मोह पर विजय प्राप्त की थी।)
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥ (शंकराचार्य जी दिन रात केवल भगवान शंकर का ध्यान करते थे, उन्होंने एक क्षण भी आपका स्मरण नहीं किया )
👇 पूरा अर्थ और मेकिंग डिटेल्स: चूंकि यहाँ शब्द सीमा (Character Limit) है, इसलिए हमने चालीसा का पूरा अर्थ (Full Meaning) नीचे 'Pinned Comment' में दे दिया है। कृपया उसे विस्तार से पढ़ें।
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