नारायणं हृषीकेशं | वासुदेवं हरिं कृष्णं | ब्रह्मनाद | दिव्य विष्णु स्तुति
Автор: Brahmnaad
Загружено: 2026-01-02
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नारायणं हृषीकेशं
गोविंदं गरुडध्वजम् ॥
वासुदेवं हरिं कृष्णं
केशवं प्रणमाम्यहम् ॥
यह श्लोक भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का स्मरण है।
जब यह मंत्र ब्रह्मनाद के साथ गूंजता है,
तो मन शांत होता है,
चित्त निर्मल होता है,
और आत्मा प्रभु के समीप पहुँचती है।
यह केवल पाठ नहीं,
यह अनुभूति है।
यह केवल शब्द नहीं,
यह दिव्य कंपन है।
🙏 इस मंत्र को श्रद्धा से सुनें,
ध्यान में बैठें,
और ब्रह्मनाद की शांति को अनुभव करें।
Brahmnaad — जहाँ ध्वनि भी साधना बन जाती है।
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