पत्नी वीकेंड पर गई, वापस लौटी तो दरवाज़ा और उसकी ज़िंदगी हमेशा के लिए बंद हो चुकी थी
Автор: Chhupe Raaz
Загружено: 2026-02-12
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क्या भरोसा टूटने के बाद उसे दोबारा बनाया जा सकता है? बेंजामिन के लिए, प्यार और विश्वास एक ही सिक्के के दो पहलू थे। उसका और जेसिका का रिश्ता सम्मान और ईमानदारी की मज़बूत नींव पर बना था। वे एक-दूसरे के लिए बने थे, एक ऐसी दुनिया में जहाँ शक की कोई जगह नहीं थी। बेंजामिन अपनी ज़िंदगी से ख़ुश था, उसे यक़ीन था कि उसने एक ऐसी साथी को पाया है जो उसकी तरह ही सोचती है और रिश्तों को अहमियत देती है। लेकिन कभी-कभी, एक छोटी-सी दरार ही पूरी इमारत को गिराने के लिए काफ़ी होती है।
यह दरार तब दिखाई दी जब जेसिका की ज़िंदगी में उसके एक नए सहकर्मी, ट्रेवर, का आगमन हुआ। पहले तो बेंजामिन ने इसे नज़रअंदाज़ करने की कोशिश की, यह सोचकर कि यह सिर्फ़ उसका वहम है। लेकिन धीरे-धीरे, छोटी-छोटी चीज़ें एक बड़ी तस्वीर बनाने लगीं। जेसिका की बातों में अब ट्रेवर का ज़िक्र ज़्यादा होने लगा था, उसके फ़ोन पर आने वाले संदेशों की संख्या बढ़ गई थी, और काम के बहाने देर रात तक बाहर रहना आम हो गया था। जो रिश्ता कभी सुकून देता था, अब बेंजामिन के लिए एक बोझ बन गया था। वह हर पल एक अनदेखे डर के साये में जी रहा था, लेकिन वह सवाल पूछकर एक असुरक्षित पति भी नहीं बनना चाहता था।
वह अंदर ही अंदर टूट रहा था, अपनी भावनाओं और शक के बीच फँसा हुआ। वह हर रोज़ सामान्य दिखने का नाटक करता, लेकिन उसका दिल जानता था कि कुछ बहुत ग़लत हो रहा है। जो हँसी कभी उसे ख़ुशी देती थी, अब उसके कानों में चुभती थी। हर बहाना एक झूठ जैसा लगता था।
और फिर वह दिन आया जब बेंजामिन को एक फ़ैसला लेना पड़ा। जेसिका ने बताया कि उसे कंपनी की तरफ़ से एक वीकेंड ट्रिप पर जाना है, जहाँ ट्रेवर भी मौजूद होगा। उस पल, बेंजामिन के सब्र का बाँध टूट गया। उसने जेसिका की आँखों में देखते हुए शांति से, लेकिन दृढ़ता से सिर्फ़ एक वाक्य कहा। एक ऐसा वाक्य जिसमें कोई गुस्सा नहीं था, कोई आरोप नहीं था, बल्कि एक अंतिम चेतावनी थी। एक ऐसी रेखा खींच दी गई थी जिसे पार करने का मतलब था सब कुछ खो देना।
क्या जेसिका उस रेखा को पार करेगी? क्या वह बेंजामिन की चेतावनी को गंभीरता से लेगी या इसे सिर्फ़ एक पल का गुस्सा समझकर नज़रअंदाज़ कर देगी? और बेंजामिन अपने कहे शब्दों पर कितना दृढ़ रह पाएगा? यह कहानी विश्वास, धोखे और एक ऐसे फ़ैसले की है जो दो लोगों की ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल कर रख देगा। जानने के लिए कहानी को अंत तक देखें कि जब भरोसा धूल में मिल जाता है, तो क्या कोई भी तर्क उसे वापस जोड़ सकता है।
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