गणगौर के उद्यापन में क्या हुआ 😱||जानिए संपूर्ण प्रक्रिया || gangaur 2025
Автор: Joyful Traditions with indu
Загружено: 2025-04-23
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गणगौर के उद्यापन में क्या हुआ 😱||जानिए संपूर्ण प्रक्रिया || gangaur 2025..
गणगौर का पर्व फाल्गुन माह की पूर्णिमा (होली) के दिन से आरंभ होता है और अगले 17 दिनों तक चलता है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गणगौर मनाया जाता है।
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गणगौर पूजा में महादेव शिव और माता पार्वती की पूजा आराधना की जाती है. महिलायें अपनी पति की लम्बी आयु, कुशलता और सुख समृद्धि के लिए महादेव शिव और माता पार्वती से आशीष मांगती हैं.
विवाहित महिलाओं द्वारा अपने सुखद वैवाहिक जीवन के लिए माता पार्वती से प्रार्थना की जाती है. कुंवारी युवतियां माता पार्वती से अपने लिए एक योग्य वर का आशीष मांगती हैं. गणगौर पूजा 2025 में कब है? गौरी तीज, गौरी तृतीया 2025 | Gangaur 2025
गौरी तृतीया या गणगौर चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जायेगी
चलिए अब हम सब चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के प्रारंभ और समाप्त होने के समय के बारे में जानकारी प्राप्त करतें हैं.
गणगौर पूजा को गौरी तीज या गौरी तृतीया के नाम से भी जाना जाता है.
यह एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण उत्सव है.
गणगौर त्यौहार में महादेव शिव और माता पार्वती की आराधना और स्तुति की जाती है.
विवाहित महिलायें अपनी पति की लम्बी आयु, कुशलता और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए महादेव शिव और माता पार्वती से प्रार्थना करती हैं.
कुंवारी युवतियां महादेव शिव और माता पार्वती से अपने लिए सुयोग्य वर की प्रार्थना करतीं हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणगौर त्यौहार को सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाने से सुख शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती
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विवाहित महिलाओं द्वारा अपने सुखद वैवाहिक जीवन के लिए माता पार्वती से प्रार्थना की जाती है. कुंवारी युवतियां माता पार्वती से अपने लिए एक योग्य वर का आशीष मांगती हैं.
👉ये पर्व स्त्री और पुरुष दोनों के लिए ही लाभदायक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से कुंवारी स्त्रियों और सुसंस्कारी पति मिलता है। वहीं विवाहित महिलाएं इस व्रत को इसलिए करती हैं कि उनका दाम्पत्य जीवन सुखी रहें। बहुत से पुरुष भी इस व्रत को करते हैं ताकि उन्हें एक अच्छी पत्नी मिले।
होली के दिन ही पूजा मंडप की स्थापना की जाती है। जिसके लिए भगवान शिव और मां पार्वती की मिट्टी से प्रतिमा बनाई जाती है। इन दोनों प्रतिमाओं की प्रतिदिन सुबह रोली, मौली, हल्दी, चावल, फूल, और दूब आदि से पूजा की जाती है। इसके बाद उन्हें चूरमे का भोग लगाकर गणगौर की आरती की जाती है। अंत में गणगौर के दिन इन प्रतिमाओं को विदा कर बहते पानी अथवा किसी पवित्र सरोवर या जल में विसर्जित कर दिया जाता है।
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