EP 88 mil 2.8.7 स्वाद का मोह और वीतराग: आसक्त और मुक्त व्यक्ति में क्या अंतर है? | बौद ्ध दर्शन
Автор: Divyang khatri
Загружено: 2026-03-10
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"In this video, we explore the Historical Research and Spiritual Wisdom of ancient India..."
स्वाद का मोह और वीतराग: आसक्त और मुक्त व्यक्ति में क्या अंतर है? | बौद्ध दर्शन
क्या एक ज्ञानी (वीतराग) और अज्ञानी (आसक्त) व्यक्ति के भोजन करने के तरीके में कोई अंतर होता है? इस वीडियो में हम राजा मिलिंद और भंते नागसेन के बीच हुए एक गहरे दार्शनिक संवाद पर चर्चा करेंगे। जब राजा मिलिंद ने पूछा कि एक राग से भरे और एक राग से मुक्त व्यक्ति में क्या अंतर है, तो भंते नागसेन ने बहुत ही स्पष्ट और सुंदर उत्तर दिया [1]। नागसेन बताते हैं कि दोनों ही अच्छे भोजन का आनंद ले सकते हैं, लेकिन एक आसक्त व्यक्ति स्वाद के साथ-साथ उसके मोह (लगाव) का भी अनुभव करता है, जबकि एक वीतराग व्यक्ति केवल स्वाद को महसूस करता है और उसमें बिल्कुल भी आसक्त नहीं होता [1]। राजा मिलिंद ने भी भंते नागसेन के इस बुद्धिमत्तापूर्ण उत्तर की गहरी सराहना की [2]। इस वीडियो को देखें और जीवन में सच्चे वैराग्य का अर्थ समझें।
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