मंत्री पूजन विधि। मातृ पूजन। मायन जनेऊ पूजन। मंडप पूजा,कोहबर पूजा,कुटना मनछुआ,तारा तीरना,मैत्रीपूजन
Автор: Aacharya Narendra shukla
Загружено: 2024-02-17
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मंत्री पूजन विधि । मातृ पूजन । मायन जनेऊ पूजन । मंडप पूजा, कोहबर पूजा, कुटना मनछुआ, तारा तीरना, मैत्रीपूजन मायन पूजा
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लड़की के हाथ में चावल-गुड़-सिन्दूर की डिब्बी रखकर कोहबर से एक सोहागवती स्त्री कन्या को आँगन में ले आवे चौक पर बिठा दे।
लगनपत्री की पूजा कराये लगनपत्री पढ़कर सब को सुना दे। लगनपत्री के भीतर पीला चावल व खड़ी हल्दी सुपारी, १ रुपया २ पैसा दूब रखकर उसे लपेट देः कलाईनारा से अच्छी तरह लपेट कर बाँध दे।
लग्नपत्री के ऊपर ५ जगह ऐपन-सेन्दुर लगवा दे।
ब्राह्मण को दक्षिणा दे नाई को न्यौछावर दे।
लड़की के हाथ में सिन्दूर की डिब्बी रखकर कोहबर ले जाय, ले जाते समय आगे-आगे पानी की धार देता रहे। कोहबर में ले जाकर सिन्दूर की डिब्बी वहाँ पर रखा दे, लड़की को दही बताशा खिला दे।
कन्या के घर से लगन आने पर बर के घर में बर को पूर्वमुख बैठाकर गौर गणेश कलश की पूजा कराने के बाद लग्नपत्री की पूजा करावे। फिर लगन खोलकर उसे पढ़े।
उसके बाद नाई, ब्राह्मण को न्योछावर व दक्षिणा दे।
वर को कोहबर में ले जाय और उसे दही गुड़ चखावे ।
बर को कोहबर में ले जाते समय उसके आगे जल की धार देते रहना चाहिए।
चकरी
कुछ जातियों में लगन पुजाने के पहले लड़की के यहाँ और लगन खोलने के पहले वर के यहाँ चकरी की पूजा होती है। कुछ जातियां में मटमंगग, गीतकढ़ेया के दिन ही चकरी रखी जाती है। अपने कुल-जाति के अनुसार यह रशम करना चाहिए।
मठमंगरा गीत स्त्रियों मंगलगान करती हैं। घर में बाहर जाकर बाग-बगीचा अथवा अन्य शुद्ध स्थान से मिट्टी खोद कर लाती हैं फिर बैठकर मूमल- ओखर्ग सूप आदि की पूजा करती हैं और जिसका विवाह हो रहा है उसके हाथ-पाँव में हल्दी उपटन लगानी हैं। जहां चकरी पहले नहीं रखी गयी है, वहाँ चकरी रखी जाती है, पीले कपड़े के टुकड़े में राई-नमक-आटे का चोकर रखकर पुटली बना दे और कलाई से बाँध दे फिर कन्या अथवा वर से उसकी पूजा करा दे। १ पुटली तथा लोहे की अँगूठी वर के दाहिने एवं कन्या के बायें हाथ में बाँध दे। बाकी ४ में से १ खम्भा में, १ कलश में, १ पीढ़ा में, १ गेडुआ (पूजाजलपात्र) में बाँधना चाहिए। ब्राह्मण को तेल-कंगन की दक्षिणा और नाई को न्यौछावर दे।
कन्या या बर के हाथ में सिन्दूर की डिब्बी देकर उसे कोहबर में ले जाय और उसे दही-बताशा खिलायें। कोहबर में ले जाते समय जल की धार देता रहे।
पून-पुनौती सिल पोहने के पहले कन्या या वर की माता ५ सोहागवती स्त्रियों के साथ जाकर कुआँ या तालाब या नदी पूजें, मिट्टी खोदें और अपने आँचल में थोड़ी सी मिट्टी लेती आवें।
मण्डप में माता आकर पश्चिम मुख खड़ी हो कन्या पिता अथवा वर पिता को पूर्व मुख खड़ा कर उसके दुपट्टे में उस मिट्टी को ५ चार अदला बदली करे।
इसी को पून-पुनौती कहते हैं। इसी मिट्टी से विवाह के लिए पिहानी या चूल्हा बनाना चाहिए। माता-पिता दोनों मण्डप के नीचे कलश के उत्तर आमने-सामने बैठ कर गाँठ बाँधकर सिल पोहें।
• सिल पोहने की विधि--
२ सिल, २ लोढ़ा सामने रखकर दोनों का ऊपरी हिस्सा मिला दे।
सिल लोढ़े पर ५-५ जगह ऐपन, सेंदुर लगावें। अक्षत-गुड़ रखें।
दाल पीसते समय दोनों के ऊपर चुनरी या पीली धोती डाल दे।
५ बार पीसकर दोनों उठें और घूमकर एक-दूसरे के सिल पर जा-जाकर दाल पीसें।
घूमते समय लोढ़ा नहीं छोड़ना चाहिए, एक-दूसरे के लोढ़े को पकड़ लेना चाहिए।
सिल पोहना
उरद और चने की भीगी हुई दाल थोड़ी-थोड़ी दोनों सिल पर रखकर पीसे।
इसी तरह ५ बार घूमें। बाद में दोनों सिल की दाल एक पर रखकर पत्नी को पीसना चाहिए। पीसने के बाद चुनरी हटाकर दोनों कलश के सामने बैठकर देव-पितरों की पूजा करें। तेल
वर या कन्या के हाथ में चावल, गुड़, सिन्दूर की डिबिया रखकर कोहबर से मण्डप में ले आयें।
• तेल चढ़ावें। विधि--
कडू तेल में सूखी पीसी हल्दी डालकर दूब से पहले ब्राह्मण चढ़ावें।
फिर ५ कुमारी कन्याएँ वर अथवा कन्या को तेल ३ बार लगायें।
तेल चढ़ाने के समय वर या कन्या के हाथ में गुड़ चावल सिन्दूर की डिबिया रख दे। □ तेल दोनों पैर की अंगुलियों में, पैर के घुटने में, हाथ की कलाई और घुटने में, दोनों कन्धों पर और माथ में लड़कियों को ५-५ बार छुवाना चाहिए। पाँचों जगह छुवाकर दूब को चूमना चाहिए। लड़कियाँ तेल चढ़ा लें तो हाय का चावल-गुड़ उस लड़की को दे दें।
इसी तरह पाँचों कन्या को अलग-अलग गुड़-चावल देना चाहिए। तेल चढ़ाने का मन्त्र- ओमु काण्डातू काण्डात् प्ररोहन्ति परुषः परुषस्परि। एवानो दूर्वे प्रतनु सहस्रेण शतेन च
इसके बाद नाइन या सोहागवती श्री तेल को मल दे।
ब्राह्मण कंगन बाँधे। कंगन विधि-
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