और कितनी निर्भया: एक आवाज़
Автор: Tejshree Purandare
Загружено: 2021-07-01
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#एक_आवाज़
आज मैं कल कोई और परसों फिर कोई और
यूं ही चलता रहेगा सिलसिलों का दौर
निर्भया, आसिफा, दामिनी, दिशा
केवल नाम बदले सबके साथ वही हुआ
कभी मिनी स्कर्ट तो कभी ब्रा स्ट्रेप पर
हर घटना का इल्जाम लगाया मुझ पर
नशे में होगी या लड़के के साथ
इसी घिनौनी सोच ने कभी नहीं छोड़ा आपका साथ
लेकिन अब...अब तो ना नशे में हूं मैं
ना ही किसी लड़के के साथ हूं में
ब्रा का हुक और स्ट्रेप भी अब कसकर छुपा लिया है मैंने
स्कर्ट जो घुटनों से उपर तुम्हारे टांगों के बीच जाती थी
अब उसको भी पूरी तरह के कवर कर लिया है मैंने
फिर क्यों ये हर बार होता है
मेरे जिस्म को एक बाज़ार समझा जाता है
सारी हदें फिर की जाती हैं पार
और फिर हैश टेग पर ट्रेंड होता है मेरा नाम
अरे उससे बेहतर किसी पिंजरे में मुझे कैद कर लो
और शराफत का नकाब किसी बेशर्मी के बाज़ार में बेच दो
अपनी मर्दांगी के बडे कायल हो तुम
लेकिन सबसे बड़े कमज़ोर और नामर्द हो तुम
जानती हूं मैं मेरी लाश को कई नाम दिए जाएंगे
दस्तावेज फाइलें पिटीशन खूब दायर किए जाएंगे
जो मेरे लिए सड़क पर उतरेंगे और देंगे धरना
उन्हें ये बेशर्म कहेंगे कानून अपने हाथ में मत लेना
कहां था वो कानून जब मुझे जिंदा गोश्त समझा गया
कहां था वो कानून जब मुझे निर्वस्त्र कर दिया गया
एक नहीं कई बार किया हर बार मेरी आत्मा का कत्ल किया
मैं चीखी, मैं चिल्लाई लेकिन इस कानून के कानों तक मेरी आवाज़ नहीं पहुंच पाई
कभी थोड़ा क्लीवेज दिखने पर टॉप को ठीक करती थी मैं
कभी जीन्स नीचे उतरने पर उसे एडजस्ट करती थी मैं
किसी लड़के को हग करने से पहले थोड़ा सोचती थी मैं
हां अपने आप को लेकर थोड़ी सी प्रोटेक्टिव थी मैं
उस रात जो हुआ वो...
उन गंदे हाथों ने छुआ था मेरे शरीर को
उन हैवानों ने नोंच लिया था सारे बदन को
वहशीपन की हदें कर दी थी पार
मुझे एक जिस्म समझकर कई बार किया बलात्कार
मेरे हर अंग पर राक्षसों की तरह टूट पड़े थे वो
नारी हूं मैं ये शायद भूल चुके थे वो
हर एक पंख को तोड़ा मरोडा और कुचल दिया
मेरे जिस्म को एक खिलौना बना दिया
जिंदा लाश की तरह एक कोने में पडी रही
मेरा सम्मान, मेरी अस्मिता सब दो पल में खत्म हो गईं
ना घाव दर्द दे रहे थे ना आखों से आसूं बह रहे थे
एक लाश थी में जिसके कई हिस्से हो चुके थे
मैं जानती हूं, ये फिर होगा
मेरे साथ नहीं तो किसी और के साथ होगा
लेकिन तुम... तुम केवल सियासत करना
मेरी लाश को हर बार नए नाम देना
ट्विटर पर दुख जताना और इंसाफ की वो पट्टी अपने आंखों पर बांध लेना
उम्मीद... वो तो मैंने कब की छोड़ दी है
उन हैवानों को सज़ा अगले जनम में मिलनी है
तुम तैयार रहना मशान लेकर
एक लाश फिर आएगी दिशा नहीं कुछ और बनकर
~तेजश्री
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