श्री कृष्ण गाथा EP 18 || Govardhan Leela (Part 1) ||
Автор: Prabhu Leela TV
Загружено: 2026-02-01
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जब अहंकार टूटता है, तब भक्ति जीतती है 🙏
इस वीडियो में देखिए श्री कृष्ण की गोवर्धन लीला, जब भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया।
यह लीला हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति और विश्वास के आगे कोई भी शक्ति टिक नहीं सकती।
✨ इस भावनात्मक और भक्तिमय प्रस्तुति को अंत तक जरूर देखें
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जय श्री कृष्णा 💙
जब संसार में अहंकार बढ़ जाता है, तब भगवान स्वयं लीला रचकर उसे तोड़ते हैं।
गोवर्धन लीला केवल एक कथा नहीं, बल्कि यह हमें भक्ति, विश्वास, विनम्रता और धर्म का सबसे बड़ा संदेश देती है।
यह वीडियो भगवान श्री कृष्ण की गोवर्धन लीला को समर्पित है — वह दिव्य घटना जब बाल गोपाल ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की और यह सिद्ध कर दिया कि
👉 ईश्वर की शरण में आया हुआ भक्त कभी असहाय नहीं होता।
🌧️ इंद्र का अहंकार और प्रकृति का प्रकोप
स्वर्ग के राजा इंद्र देव को यह भ्रम हो गया था कि
“मेरे बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं।”
ब्रज में हर वर्ष इंद्र यज्ञ किया जाता था।
परंतु श्री कृष्ण ने देखा कि लोग कर्म और प्रकृति से अधिक देवताओं से डरकर पूजा कर रहे हैं।
भगवान कृष्ण ने नंद बाबा और ब्रजवासियों को समझाया —
“हमारा कर्तव्य है कर्म करना,
पर्वत, गाय और भूमि की पूजा करना,
क्योंकि यही हमें जीवन देते हैं।”
श्री कृष्ण की बात मानकर ब्रजवासियों ने इंद्र यज्ञ छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा की।
यहीं से अहंकारी इंद्र का क्रोध जाग उठा।
⛈️ विनाशकारी वर्षा और ब्रजवासियों की पीड़ा
इंद्र ने क्रोधित होकर
समवर्तक मेघों को आदेश दिया —
“ब्रज को जल में डुबो दो!”
भयानक वर्षा होने लगी,
बिजलियाँ चमकने लगीं,
गायें काँपने लगीं,
बच्चे रोने लगे,
पूरा ब्रज भय से भर गया।
चारों ओर विनाश ही विनाश था।
तभी ब्रजवासियों की एक ही पुकार थी —
“हे कन्हैया! हमें बचाओ!”
🏔️ गोवर्धन पर्वत का उठना – ईश्वर की करुणा
भगवान श्री कृष्ण ने मुस्कुराकर
अपनी बायीं छोटी उंगली उठाई
और गोवर्धन पर्वत को छत्र की तरह उठा लिया।
सात दिन और सात रातें —
न भोजन की चिंता
न वर्षा का भय
न अंधकार का डर
भगवान स्वयं ब्रजवासियों के रक्षक बने।
यह दृश्य केवल शक्ति का नहीं था,
यह करुणा, प्रेम और संरक्षण का प्रतीक था।
🐄 भक्ति की परीक्षा और विश्वास की जीत
ब्रजवासी गोवर्धन के नीचे
पूरी श्रद्धा से खड़े रहे।
कृष्ण ने उन्हें सिखाया —
“डरो मत,
जब तक विश्वास है
तब तक ईश्वर साथ है।”
इंद्र देव का अहंकार चूर-चूर हो गया।
🙇♂️ इंद्र का पश्चाताप और क्षमा
अंततः इंद्र को अपनी भूल का ज्ञान हुआ।
उन्होंने श्री कृष्ण के चरणों में गिरकर कहा —
“हे प्रभु,
अहंकार ने मेरी बुद्धि हर ली थी।”
भगवान कृष्ण ने उन्हें क्षमा कर दिया,
क्योंकि ईश्वर दंड नहीं, सुधार करता है।
🕉️ गोवर्धन लीला का आध्यात्मिक संदेश
इस लीला से हमें कई जीवन-मंत्र मिलते हैं —
✨ अहंकार का अंत निश्चित है
✨ भक्ति सबसे बड़ी शक्ति है
✨ ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा स्वयं करता है
✨ प्रकृति और कर्म का सम्मान करना चाहिए
✨ सच्चा धर्म प्रेम और करुणा है
📿 आज के युग में गोवर्धन लीला का महत्व
आज जब मनुष्य स्वयं को सर्वशक्तिमान समझने लगा है,
प्रकृति को नष्ट कर रहा है,
तब गोवर्धन लीला हमें चेतावनी देती है —
“प्रकृति से बड़ा कोई नहीं,
और ईश्वर से बड़ा कोई नहीं।”
🎬 इस वीडियो के बारे में
इस वीडियो में हमने प्रयास किया है कि —
कथा भावनात्मक हो
दृश्य दिव्य हों
संगीत भक्तिमय हो
और हर दृश्य में कृष्ण का करुण स्वरूप दिखे
यह वीडियो केवल देखने के लिए नहीं,
महसूस करने के लिए है।
🙏 हमारी आपसे विनती
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💙 जय श्री कृष्णा
गोवर्धन धारी
माखन चोर
ब्रज के प्राण
हम सबके नाथ
जय श्री कृष्णा 🙏
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