राजसूय यज्ञ के अवसर पर श्री कृष्ण की अग्रपूजा की कथा||🙏🙏|| rajsu Yagya ke avsar per Shri Krishna ki
Автор: Radha Krishna bhakti Gyan Sudha Shukla
Загружено: 2025-11-02
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युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में श्री कृष्ण की अग्रपूजा की कथा एक महत्वपूर्ण घटना है, जिसमें श्री कृष्ण को सबसे पहले सम्मानित करने का निर्णय लिया गया था। इस यज्ञ का आयोजन युधिष्ठिर ने अपनी राजधानी इंद्रप्रस्थ में किया था, जिसमें देश-विदेश के राजा, मंत्री और आम लोग शामिल हुए थे।
कथा का सारांश:
राजसूय यज्ञ के दौरान अग्रपूजा के लिए पात्र का चयन करना था, जिसमें सभी सभासदों की राय ली गई।
भीष्म ने श्री कृष्ण का नाम सुझाया और सहदेव ने इसका समर्थन किया, जिसमें कहा गया कि श्री कृष्ण ही अग्रपूजा के योग्य हैं।
शिशुपाल ने इसका विरोध किया और श्री कृष्ण की निंदा करने लगा, जिससे क्रोधित होकर श्री कृष्ण ने अपना सुदर्शन चक्र चलाकर शिशुपाल का वध कर दिया।
शिशुपाल की मृत्यु के बाद, यज्ञ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और सभी राजाओं ने युधिष्ठिर को सम्मानित किया।
महत्वपूर्ण बिंदु:
*श्री कृष्ण की अग्रपूजा*: युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में श्री कृष्ण को सबसे पहले सम्मानित करने का निर्णय लिया गया, जो उनकी महानता और योगदान को दर्शाता है।
*शिशुपाल का वध*: शिशुपाल की निंदा और विरोध के कारण श्री कृष्ण ने उसका वध कर दिया, जो न्याय और धर्म की रक्षा के लिए आवश्यक था।
*यज्ञ का महत्व*: राजसूय यज्ञ एक महत्वपूर्ण अवसर था, जिसमें युधिष्ठिर ने अपनी राजधानी और अपनी महानता को प्रदर्शित किया।
युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में श्री कृष्ण की अग्रपूजा की कथा हमें सिखाती है कि सच्चाई और न्याय की रक्षा के लिए हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए। साथ ही, यह भी दर्शाती है कि महान व्यक्तियों का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है।
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