Udayan Vajpeyi, Lecture on ‘Cinema aur Samay’
Автор: Centre for the Study of Developing Societies
Загружено: 2026-06-01
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भारतीय भाषा कार्यक्रम, सीएसडीएस
द्वारा आयोजित व्याख्यान में आपका स्वागत है
सिनेमा और समय
वक्ता: उदयन वाजपेयी
अध्यक्षता: राकेश पांडेय
समय और सिनेमा का सम्बन्ध कई स्तरों पर होता है। सिनेमा एक विशेष समय में बनाया गया होता है। वह समय अपने में ही बहुल होता है पर साथ ही कई फ़िल्में उससे सीधे सम्बन्ध बनाती हैं, कई उससे पूरी तरह उदासीन रही आती हैं। कई का सम्बन्ध इन दोनों के बीच में कहीं होता है। दूसरा, सिनेमा के भीतर एक से अधिक समय के विन्यास उद्घाटित होते हैं। सिनेमा इस अर्थ में भाषा से अलग होता है। भाषा में कम-से-कम एक वाक्य के भीतर सिर्फ़ एक समय उद्घाटित होता है। इससे बिल्कुल अलग सिनेमा में एक ही दृश्य में स्वप्न की तरह एक से अधिक समय एक साथ उद्घाटित हो सकता है। जैसे इंगमान बर्गमैन की फ़िल्म ‘वाइल्ड स्ट्रॉबेरीज़’ के एक ही दृश्य में एक वैज्ञानिक अपना अतीत देख रहा है। ऐसे दृश्यों में वैज्ञानिक का वर्तमान और उसका अतीत एक साथ अनुभवगम्य हो उठते हैं। इसके अलावा सिनेमा लोकप्रिय माध्यम भी है, जो पॉपुलिस्ट रूपाकार भी ग्रहण करता है। यह लोकप्रिय रूपाकार लोक कलाओं पर धीरे-धीरे आरोपित हो रहा है, इस रास्ते भी सिनेमा लोक कलाओं में निरन्तर आन्दोलित होते अनेक समयों को विस्थापित करने के भयानक कार्य में शामिल होता है।
10 दिसंबर, 2025, शाम 5 : 00 बजे सेमिनार रूम, सीएसडीएस, दिल्ली
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