श्री जी की मेंहदी रचना में कैसे पहुंचे ठाकुर जी, shreeji ki mehndi rachna me kese pahunche thakurji
Автор: @bhakti or prem
Загружено: 2026-03-01
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🌸जब ठाकुर जी गए श्री जी को मेंहदी लगाने — मेंहदी वाली का वेश बनाकर
बरसाने में उत्सव का माहौल था। सखियाँ गा रही थीं, ढोलक बज रही थी, और श्री जी के हाथों में मेंहदी रचाने की तैयारी हो रही थी।
तभी एक नई मेंहदी वाली महल के द्वार पर आई —
सर पर घूँघट, हाथ में मेंहदी की कोन, और मधुर सी मुस्कान।
किसी ने पहचाना नहीं…
वह और कोई नहीं, स्वयं कृष्ण थे —
जो अपनी प्रिय राधा (श्री जी) को देखने और छेड़ने के लिए मेंहदी वाली का वेश बनाकर आ गए थे।
🌿 मधुर लीला का आरंभ
सखियों ने हँसते हुए कहा —
“अरी मेंहदी वाली, हमारी श्री जी के हाथों में सबसे सुंदर बेल-बूटे बनाना।”
कृष्ण ने कोमलता से राधा के हाथ थामे।
मेंहदी रचाते-रचाते उन्होंने हथेली में अपना ही नाम लिख दिया —
“श्याम”
राधा ने मुस्कुराकर पूछा —
“अरी सखी, यह नाम किसका लिख दिया?”
कृष्ण ने इशारों में उत्तर दिया —
“जिसका नाम तुम्हारे हृदय में सदा बसता है…”
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