🔱Rudrashtakam | Most Powerful Shiva Stotram for Meditation & Focus | रुद्राष्टकम् | Om Namah Shivaya
Автор: Sacred Bhajans Live
Загружено: 2026-02-10
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Описание:
🕉️ Rudrashtakam | रुद्राष्टकम् | Most Powerful Shiva Stotram for Deep Meditation, Focus & Inner Peace
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🙏 Har Har Mahadev! Welcome to Sacred Bhajans Live🙏
Experience the divine vibrations of Rudrashtakam —one of the most powerful and sacred hymns dedicated to Lord Shiva, composed by the great Goswami Tulsidas Ji. This ancient stotram invokes the supreme energy of Lord Rudra and is known to bring deep focus, mental clarity, inner peace, and spiritual awakening.
Whether you are meditating, studying, working, or simply seeking calmness in your daily life — this powerful Shiva chanting will transform your energy and surroundings.
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📜 ABOUT RUDRASHTAKAM:
Rudrashtakam (रुद्राष्टकम्) is an eight-verse hymn composed by Goswami Tulsidas in praise of Lord Shiva (Rudra). It appears in the Uttara Kanda of the Ramcharitmanas. Each verse describes the cosmic form, power, and compassion of Mahadev, making it one of the most recited Shiva stotrams across India and the world.
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✨ BENEFITS OF LISTENING TO RUDRASHTAKAM:
🔱 Improves Focus & Concentration
🔱 Enhances Meditation & Mindfulness
🔱 Removes Negative Energy
🔱 Brings Inner Peace & Mental Clarity
🔱 Ideal for Deep Work Sessions
🔱 Reduces Stress, Anxiety & Restlessness
🔱 Invokes Blessings of Lord Shiva & Maa Parvati
🔱 Purifies Home, Mind & Soul
🔱 Powerful during Shravan Maas, Maha Shivaratri & Pradosh Vrat
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📖 RUDRASHTAKAM LYRICS (Sanskrit with Hindi Meaning):
श्लोक १
संस्कृत
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥
हिंदी अर्थ
मैं ईशान स्वरूप भगवान शिव को प्रणाम करता हूँ,
जो मोक्षस्वरूप हैं, सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापक हैं,
जो स्वयं ब्रह्म हैं और वेदों का स्वरूप हैं।
जो निर्गुण, निर्विकार, निष्काम हैं
और चेतन आकाश के समान सर्वत्र व्याप्त हैं।
श्लोक २
संस्कृत
निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं
गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकालकालं कृपालं
गुणागारसंसारपारं नतोऽहम् ॥
हिंदी अर्थ
जो निराकार हैं, ओंकार के मूल हैं,
जो तुरीय अवस्था में स्थित हैं,
वाणी, बुद्धि और इंद्रियों से परे हैं,
जो कैलाशपति, महाकाल के भी काल हैं,
करुणामय हैं और संसार के बंधनों से पार ले जाने वाले हैं।
श्लोक ३
संस्कृत
तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरं
मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा
लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥
हिंदी अर्थ
जो हिमालय के समान उज्ज्वल और गंभीर हैं,
जिनका तेज करोड़ों कामदेवों के समान है,
जिनके मस्तक से पवित्र गंगा प्रवाहित होती है,
जिनके मस्तक पर चंद्रमा और कंठ में सर्प शोभायमान हैं ।
श्लोक ४
संस्कृत
चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं
प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि ॥
हिंदी अर्थ
जिनके कुंडल हिलते हैं, जिनकी भौंहें और नेत्र विशाल हैं,
जिनका मुख प्रसन्न और कंठ नीलवर्ण है,
जो करुणामय हैं, व्याघ्रचर्म धारण करते हैं
और मुंडमाला से विभूषित हैं—
ऐसे सर्वनाथ शंकर की मैं उपासना करता हूँ ।
श्लोक ५
संस्कृत
प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम् ।
त्र्यःशूलनिर्मूलनं शूलपाणिं
भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥
हिंदी अर्थ
जो प्रचंड, श्रेष्ठ, पराक्रमी और परमेश्वर हैं,
जो अखंड, अजन्मा और करोड़ों सूर्यों के समान प्रकाशमान हैं,
जो त्रिशूल धारण कर दुःखों का नाश करते हैं—
ऐसे भवानीपति शिव को मैं भजता हूँ,
जो भक्ति से ही प्राप्त होते हैं।
श्लोक ६
संस्कृत
कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।
चिदानन्दसंदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥
हिंदी अर्थ
जो काल से परे हैं, कल्याणकारी हैं,
सृष्टि के अंत के भी कर्ता हैं,
सज्जनों को आनंद देने वाले और त्रिपुरासुर का संहार करने वाले हैं,
जो अज्ञान और मोह का नाश करते हैं—
हे कामदेव के संहारक प्रभु, कृपा कीजिए।
श्लोक ७
संस्कृत
न यावद् उमानाथपादारविन्दं
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ॥
हिंदी अर्थ
जब तक मनुष्य इस लोक या परलोक में
उमा-पति शिव के चरणकमलों का भजन नहीं करता,
तब तक उसे न सुख मिलता है, न शांति,
न ही दुःखों का नाश होता है।
हे सर्वभूतों में वास करने वाले प्रभु, कृपा करें।
श्लोक ८
संस्कृत
न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम् ।
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ॥
हिंदी अर्थ
मैं न योग जानता हूँ, न जप, न पूजा,
मैं तो सदा सर्वदा आपको ही नमन करता हूँ, हे शंभु।
जरा, जन्म और दुःखों से पीड़ित मुझे
हे ईश्वर, शरणागत जानकर रक्षा कीजिए।
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📝 Lyrics: Goswami Tulsidas Ji (16th Century)
🎬 Video Production: Sacred Bhajans Live
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ॐ नमः शिवाय | Om Namah Shivaya | हर हर महादेव 🙏🕉️🔱
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