हिमालय के निरंकार देवता । Nirankar devta of the Himalayas |
Автор: Himalayilog
Загружено: 2023-05-08
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पैंया का पेड़ क्यों पूजा जाता है निरंकार की पूजा में ?
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निरंकार व नरंकार क्या एक ही देवता हैं ?
परिकल्पना- डा. हरीश चंद्र लखेड़ा
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– By Dr Harich Chandra Lakhera
हिमालय के निरंकार देवता । Nirankar devta of the Himalayas |
निरंकार देवता कई जाति वंशों के कुल देवता हैं। इनको अब निरंकार या नरंकार भी कहा जाता है। जैसा कि नाम से साफ है कि उनका कोई आकार नहीं है। इसलिए उनकी कोई प्रतिमा भी नहीं मिलती हैं। निरंकार देव, देवाधिदेव शिव महादेव के अवतार माने जाते हैं। उत्तराखंड में मान्यता है कि महाप्रलय के दौरान सबसे पहले महाकाली का अवतरण हुआ था। उसके बाद निरंकार भगवान अवतरित हुए । निरंकार को बड़ा चमत्कारी देवता माना जाता है। उत्तराखंड में उनको ठुल देवता यानी बड़ा देवता कहा जाता है। यहां विश्वास है कि ठुल देवता निरंकार सभी इच्छाओं को पूरा करते हैं। वे औघड़ जोगी हैं। निर्धन की झोली सिर्फ निरंकार ही भर सकते हैं। गढ़वाल क्षेत्र मे शिव की पूजा लोक देवता निरंकार के रूप में की जाती है। इन्हे नागपंथ का देवता भी माना जाता हैं। यह सभी कष्टों को हरने वाले देवता माने जाते हैं। निरंकार जी को बड़ा देवता या सर्वोच्च भगवान कहा जाता है और सभी के द्वारा उनकी पूजा की जाती है, लेकिन केवल शिल्पकार समुदाय ही निरंकार जी की पूजा करता है।
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