भडातर Festival Guthan || Jai Doom devta || Himachali culture ||
Автор: Seemakshi's_World
Загружено: 2023-05-23
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20'21'22 May 2023
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देवभूमि हिमाचल के जिला शिमला की तहसील ठियोग में
अवस्थित पावन स्थान गुठाण में देवता श्री डोम सन्नाटा (डोमेश्वर) जी महाराज के भडातर महोत्सव का विहंगम दृश्य
श्री डोम सन्नाटा (डोमेश्वर) जी गुठाण शिमला व सोलन जिलों की 18 ठकुराइयों और 22 रियासतों के आराध्य देवता है जो हर 20 वर्ष के बाद परम्परानुसार इन सभी स्थानों में जातर यात्रा के लिए प्रस्थान करते हैं। परम्परानुसार यह जातर नृत्य उत्सव हर 20 साल बाद होता है। जिला शिमला व सोलन की 18 ठकुराइयों और 22 रियासतों में लगभग 400 से अधिक स्थानों पर का दौरा पूर्ण होने के बाद डोम देवता जी अपने धाम गुठाण में वापिस पहुँचे हैं और जातर यात्रा समाप्त होने के बाद गुठाण में 20,21,22 मई, 2023 को एक भव्य उत्सव जिसे "भडातर" नाम से जाना जाता है, का आयोजन हुआ है। अलग अलग देवठियों से देवता पालकी (रथ) में व छडी (देव चिन्ह) सहित इस ऐतिहासिक व भव्य देव उत्सव में पधारे हैं। ढोल, नगाड़ों, करनालों की लोक धुनों पर सभी अथिति देवताओं का भव्य स्वागत, देव मिलन व पारंपरिक खढासन मंत्रों, शाबर मंत्रों से सभी देवताओं पूजन हुआ। देवताओं ने अपने देवा (गूर) के माध्यम से समस्त आमंत्रित अतिथियों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया।
डोम देवता (डोमेश्वर) जी के स्वर्ण जटित प्रतिमाओं से युक्त रथ की परिक्रमा में देवलुओं द्वारा पारम्परिक वेशभूषा में परंपरागत चोल्टू नृत्य पारम्परिक रीति से किया गया। ऊपरी शिमला में देवी-देवताओं से जुड़ा है चोल्टू नृत्य। इसमें रथनुमा पालकी में बैठाई गई देव प्रतिमाएं नचाई जाती हैं तो इसकी गोलाई में चोल्टू नृत्य होता है। एक खास तरह की पोशाक को चोल्टू कहते हैं। इसके साथ पगड़ी पहनी जाती है। इसे पहनकर देव-कारिंदे ढोल, नगाडों, करनालों और शहनाई के सुरों पर नाचते हैं।
इस भव्य भडातर उत्सव में उन सभी ठकुराई, रियासतों व स्थानों से सभी लोग आमंत्रित हुए हैं जहां -जहां देवता जी का जातर नृत्य हुआ है। तीन दिवसीय इस उत्सव में हजारों की संख्या में दूर-दूर से लोगों ने गुठाण पहुँचकर उत्सव में भाग लिया है और देवता जी का आशीर्वाद ग्रहण करने सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उत्सव के समापन के बाद ही डोम देवता जी मंदिर में प्रवेश करेंगे। हर 20 साल के बाद परम्परानुसार होने वाले इस जातर उत्सव का हिस्सा बनकर हर एक व्यक्ति अपने आप को कृत-कृत्य महसूस करता हुआ देव आशीर्वाद व पुण्य का भागीदार बनकर गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
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