श्री हित चौरासी पद गायन 34-36 | Shri Hit Chaurasi ji हिन्दी lyrics
Автор: bhajan bhakti saar
Загружено: 2026-01-13
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श्री हित हरिवंश जी के हित चौरासी के पद 34, 35 और 36 —
रसिक वैष्णव परंपरा के उन अमूल्य पदों में से हैं,
जहाँ राधा–कृष्ण की लीला
केवल दृश्य नहीं, बल्कि अनुभव बन जाती है।
इन पदों में प्रभात-विहार के बाद
नव निकुंजों में भ्रमण,
मधुर हास–परिहास,
प्रेम-विह्वल आलिंगन,
झूला-विहार और
यमुना तट पर दिव्य रास का
अत्यंत भावमय चित्रण है।
यह लीला काम नहीं —
यह ब्रह्मरस की अभिव्यक्ति है।
जो भक्त इन पदों का श्रवण करता है,
उसका हृदय श्रीराधा चरण-कमलों की
प्रेम-रति से सिंचित हो जाता है।
यह प्रस्तुति उसी रसिक परंपरा की
एक विनम्र सेवा है,
जिसका उद्देश्य है —
श्रवण से हृदय में प्रेम जगाना।
🙏 जय श्री राधे कृष्ण 🙏
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