महाशिवरात्री पर शिव पुजन,श्रीलिगांष्टकम स्तोत्र द्वारा अभिषेक।भ्रम में भ्रमण व्यर्थ है।भक्तीस्वयंकरे
Автор: Maa Kali Kripa माँ काली कृपा
Загружено: 2026-02-16
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महाशिवरात्री रविवार रात्री तृतीय प्रहर शिव पुजन, लिगांष्टकम स्तोत्र, रूद्राभिषेक किया गया।
।मानव को भ्रम में व्यर्थ भ्रमण त्याग कर स्व कल्याण के लिये परिश्रम कर स्वयं ईश्वर पुजा भक्ती उपासना करना उतम है।मनुष्य का प्रारब्द कर्म,ग्रह गोचर प्रगति में बाघक होता है।जो गुरू शरण,ईश्वर भक्ती में सर्मपित भाव द्वारा परिश्रम करते है वही सफल होते है।
महाशिवरात्री रविवार रात्री माँ महाकाली ज्योतिष अनुष्ठान केन्द्र रावटी बालसंमद रोड़ चुगीं नाके के पीछे जोघपुर राजस्थान निजी साघना स्थल पर वहां के ब्रहमलीन गाद्धिपति गुरू शंकर भगवान कृपा से माँ महाकाली महादेव् उपासक उस्ताद द्वारा सामुहिक रूद्राभिषेक अनुष्ठान साघना कराया गया।शिव शंकर भोलेनाथ महादेव पुजन, रूद्राभिषेक अनुष्ठान साघना स्वीकार कर,कृपा करे। मानव जीवन के लिये ईश्वर भक्ती ही प्रगतिकारक है।शेष सांसारिक कार्य स्वतः ही कर्म कर प्रगति दायक बनने प्रारम्भ हो जाते है। मानव जीवन को भ्रम में भ्रमण कर व्यर्थ करने बुद्धिमता नहीं।अपितु गुरू कृपा ज्ञान ग्रहण कर परिश्रम द्वारा ईश्वर भक्ती उपासना करे। ईश्वर उपासना में मानव की कर्मठता परिश्रम,दृढ़ निश्चय,त्याग, तप की परीक्षा अवश्य होती है।
।जय शिव शंकर भोलेनाथ, श्री महाकाली महादेव सदा सहाय।।।।।।
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