Kajal Mata Ghani Re Mahan | Anand | Priya | Piru | Chetan | New Adivasi Cultural HD Video 2020
Автор: MP Gujrati Adivasi Timli Club
Загружено: 2020-10-05
Просмотров: 493513
Описание:
BHARAT SASTIYA RTW & ROHIT PADHIYAR PRESENT
RANI KAJAL MATA HD VIDEO SONG 2020
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आनंद राठवा प्रिया राठवा चेतन कनेश पीरु सोलंकी का पहला आदिवासी सांस्कृतिक विडियो
राती काजल माता घणी रे महान... आदिवासी कुलदेवी काजल माता का पहला सांस्कृतिक विडियो 2020
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MP Gujrati Adivasi Timli Club Present
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Title - Kajal Mata Ghani Re Mahan | Rani Kajal Mata Video Song 2020
Artist - Aanand Rathwa | Priya Rathwa | Chetan Kanesh | Piru Solanki | Rohit Padhiyar | Lala Nargawa
Singer - Piru Solanki | Chetan Kanesh
Music - Nansing Mandloi
Music Director - Vishal Kanesh
Lyrics - Rohit Padhiyar
Camera - Amit Rathwa
Cinematography - Mehul Rathwa | Mayank Patel
Drone - Jignesh Rathwa
Chrographer - Shankar Bharle | Ankit Shishulkar
Editing - Mehul Dharva Rathwa | Mayank Patel
Design - Nikunj Modi
Producer - Bharat Sastiya | Rohit Padhiyar
Video Director - Bharat Sastiya
Recording - Jay Ambe Recording Studio Kawant ( Shailesh Rathwa )
Release by - MP Gujrati Adivasi Timli Club
© - MP Gujrati Adivasi Timli Club
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राणी काजल माता की गाथा
संकलन - रोहित पड़ियार
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(चुकी आदिवासियों में मौखिक परम्पराओं का प्रचलन है इसलिए बयान/ व्यख्या अलग अलग व्यक्ति/ क्षेत्र के हिसाब से अलग अलग हो सकती है लेकिन कथा का मूलभाव समान है।)
कहा जाता है कि मथवाढ़ क्षेत्र में डुंगरिया रावत कुल की कर्म भूमि हुआ करती थी इसी कुल के दो पूजनीय देव कुंदूराणा और उनके बड़े भाई कुनबाई अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध थे। कुनबाई व कुंदुराणा के तीन बहने थी आइकुन्दण, आईमांदणी तथा आईछिनकी।
आइकुन्दण जीवनभर कुवारी थी, आईमांदणी का विवाह मावी डावर के साथ हुआ और आईछिनकी वर्तमान गाव छिनकी जाकर बसी, उन्ही के नाम से गाव का नाम छिनकी रखा गया।
सबसे बड़े भाई कुनबाई के विवाह के लिए जब वधु की तलाश की जा रही थी तो तब इन्हें पता चला कि महाराष्ट्र के नंदुरबार क्षेत्र में हुरिया मेघ की सात पुत्रियां है - देवमोगरा / मोगी माता, राणी काजल तथा अन्य।
काजल माता का विवाह चाँद से तय हुआ था किंतु उसे आदिदेव कुनबाई भी पसंद करते थे इसलिए मोहनी (तंत्र मंत्र से मन मोह कर) का सहारा लेकर जब महाराष्ट्र के हेलादाब में विवाह के लिए एकत्र थे वहा से भगाकर अपने साथ लेकर मथवाढ़ क्षेत्र में लेकर आये।
सोमला नायक का पुत्र चवरिया नायक भी राणी काजल माता को पसंद करता था इसलिए उसने कुनबाई और कुंदुराणा को युद्ध लिए ललकारा और दोनों भाइयों का चवरिया नायक से भयंकर युद्ध हुआ। अंततः कुनबाई और कुंदुराणा विजयी रहे।
(चवरिया नायक पहली बार काजल माता को नर्मदा नदी मछली मारते हुए देखा था, चवरिया नायक जिस चट्टान पर बैठकर मछली मार रहे वह आंजनबारा में थी और चवरिया दगड़ा के नाम से जाना जाता था किंतु अब बांध के कारण डूब चुका है।)
आखिर में जलसिंधी नामक गाँव मे राणी काजलमाता और कुनबाई का विवाह हुआ इस अवसर जलसिंधी में 700 दाबलिया (700 देवता ) देशी महुए की शराब पीकर ढोल मांदल की ताल पर नाचे थे, जिनके पैरो के निशान आज भी जलसिंधी में नर्मदा किनारे चट्टानों पर बने हुए है पर सरदार सरोवर बांध की डूब में समा गए है।
विवाह के बाद काजल माता भाला वांगा ( वर्तमान का भाला गाव ) में बसी थी किंतु वहाँ पर उगते सूर्य की तेज किरणों के कारण फिर वहा से हटकर वर्तमान में जहाँ पर काजल माता का मंदिर स्थापित है वेलिये पीपर के नीचे आकर बस गई।
वर्तमान में मध्यप्रदेश के अलिराजपुर जिले में मथवाढ़ क्षेत्र के वाकनेर नामक गाँव मे दो मंदिर स्थापित है और दोनों ही आदिवासियों के आस्था स्थल है सबसे ऊपर वाला मन्दिर राणी काजल माता का है और नीचे स्थापित मंदिर काजल माता की ननंद आइकुन्दण का है जो जीवनभर कुँवारी रही।
जय आदिवासी जय जोहर जय माँ रानीकाजल।🙏🏻🏹
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