Maithili Vidyapati Geet (Maheshwani/Nachari): Aju Nath ek brat, Mahasukh lagat he
Автор: Melodic Anita
Загружено: 2022-06-25
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Lyrics & Meaning
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विद्यापति गीत ( आजु नाथ एक ब्रत )
(महेशवानी / नचारी)
आजु नाथ एक ब्रत, महासुख लागत हे
आहे अहुँ शिव धरु नट वेश, कि डमरू बजाबहु हे
१. आहे तोहे जे कहैछ गौरा नाच , हम कोना नाचब हे
आहे चारि सोच मोरा लागल, कौने विधि बाचत हे
२. अमिय चुबिय भूमि खसत, बाघम्बर जागत हे
आहे होयत बाघम्बर बाघ, की बसहा धरि खायत हे
३. सिर सँ जे ससरत सांप , चहु दिसि जायत हे
आहे कार्तिक पोसल मयूर, कि सेहो धरि खायत हे
४. जटा सँ ओ छलकति गंग, भूमि पर पाटत हे
आहे होयत सहस्त्रों मुखधार, समेटलो नै जायत हे
५. मुण्डमाल टूटि खसत, मसानी जागत हे
आहे अहुँ गौरा जायब पड़ाई, कि नाच के देखत हे
६. भनहि विद्यापति गाओल , गाबि के सुनाओल हे
आहे राखल गौरी के मान , शिव चारु बचाओल हे
गीत का हिंदी सारांश
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माँ पार्वती(गौरी) भोलेनाथ(शिव) से कहती हैं कि मेरा एक अनुरोध यदि आप मानें तो मुझे महासुख की अनुभूति होगी . हे शिव , आप नटराज रूप में आकर डमरू बजाते हुए मेरे लिए नृत्य करें.
शिव कहते हैं -- हे गौरी, तुम जो मुझे नाचने बोल रही हो , मैं कैसे नाचूँ, मुझे चार सोच सता रहे हैं . अगर मैं नाचूंगा तो (१) अमृत चूकर भूमि पर गिरेगा और मेरा बाघम्बर जाग कर बाघ(शेर) हो जायेगा और मेरे वृषभ (नंदी) को खा जायेगा (२) मेरे सिर से फिसलकर सांप चारो ओर जायेंगे और कार्तिक का पाला हुआ मयूर (कार्तिक का वाहन) उनको खा लेगा (३) मेरी जटाओं से गंगा छलकेगी और भूमि पर सहस्त्रों धार के रूप में बहने लगेगी जिसे समेटना मुश्किल हो जायेगा (४) मेरा मुण्डमाल टूट कर गिरेगा और श्मशान जाग जायेगा जिसे देखकर, हे गौरी, तुम भी भाग जाओगी तो मेरा नृत्य कौन देखेगा?
कवि विद्यापति गाकर कहते हैं की गौरी का मान रखने के लिए शिव चारो शंकाओं को बचाते हुए उनके लिए नृत्य करते हैं .
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