इन पंचदेवों की पूजा मतलब सभी देवताओं की पूजा, घरों में कितनी बड़ी मूर्ति रखना चाहिए
Автор: गुरुजी कहिन -"धर्म, अध्यात्म, संस्कृति, कर्मकाण्ड"
Загружено: 2020-04-22
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सनातन परंपरा में पूजन पाठ अत्यंत आवश्यक कर्म माने गए हैं इन्हें कर्मकांड या उपासना पद्धति के नाम से जाना जाता है इसके अंतर्गत तीन प्रकार के अनुष्ठान या पूजा कर्म जिन्हें नित्य नैमित्तिक तथा काम में कर्म भी कहा जाता है इन सभी प्रकार के पूजन घर पर देवालयों में तथा #यज्ञशाला आदि अन्य स्थानों पर भी किए जा सकते हैं यहां इस वीडियो में हम घर पर किए जाने वाले पूजा पाठ के संबंध में जानकारी दे रहे हैं यहां यह बताया जा रहा है कि यदि हम अपने पूजन क्रम में अपने घर के देवस्थान पर पंच देवों को स्थापित कर पूजा पाठ करते हैं तो वैदिक पद्धति के जितने भी देवी देवता हैं उन सभी की पूजा पाठ को इस पंचदेव पूजन में समाहित माना जाता है #पंचदेव वे पाँच प्रधान देवता हैं, जिनकी #उपासना और पूजा आदि #हिन्दू_धर्म में प्रचलित है और जिन्हें अनिवार्य माना गया है। इन देवताओं में यद्यपि तीन देवता #वैदिक हैं, लेकिन फिर भी सभी का ध्यान और #पूजा_पौराणिक और #तांत्रिक_पद्घति के अनुसार ही की जाती है।
पाँच देवता
इन पाँच देवताओं में जिनकी गिनती की जाती है, उनके नाम इस प्रकार हैं-
1. आदित्य अर्थात सूर्यदेव
2. रुद्र मतलब भगवान शिव
3. विष्णु
4. गणेश
5. देवी साक्षात त्रिगुणात्मिका महाशक्ति
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इन देवताओं में प्रत्येक के अनेक विग्रह हैं। इनके विग्रहों के अनुसार इनकी अनेक नाम से उपासना होती है। कुछ लोग पाँचों देवताओं की उपासना समान भाव से करते हैं और कुछ लोग किसी विशेष संप्रदाय के अंतर्गत होकर किसी विशेष देवता की उपासना करना पसन्द करते हैं। भगवान विष्णु के उपासक 'वैष्णव', शिव के उपासक 'शैव', सूर्य के उपासक 'सौर' और गणपति के उपासक 'गाणपत्य' कहलाते हैं।
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