निर्भय गुर्जर के पास नए नए हथियार थे,कहता था पुलिस ने दिए,गिरोह टीवी देखता था, एके -47 राइफलें थीं।
Автор: Rajesh Badal
Загружено: 2013-04-09
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चम्बल के बीहड़ों में डाकू परंपरा का आख़िरी बड़ा संगठित गिरोह निर्भय सिंह गुर्जर का था। यह गिरोह पुराने और नए तरीकों का शानदार संगम था। उसने पुराने पैटर्न पर अमीरों को लूटने का ढंग तो अपनाया ही ,नए ज़माने में बिना गोली चलाए अपहरणों का पेशेवर धंधा भी शुरू किया। उसके गिरोह में हरदम पांच से दस अपहृत रहते थे। यह गिरोह बीहड़ों में टीवी देखता था, सोलर लाइट इस्तेमाल करता था ,पोलोराइड कैमरे से तस्वीरें निकालता था। वीसीआर पर फ़िल्में देखता था और आधुनिकतम हथियारों की खरीद फ़रोख़्त करता था। ए के - 47 जैसी घातक राइफलें उसके पास थीं। बीहड़ के जिस इलाक़े में उसका गिरोह पड़ाव डालता था , उसकी बाक़ायदा पुलिस को ख़बर होती थी। इस काम के लिए पुलिस को पैसे भी मिलते थे।
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#ravines of chambal
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