भावना जैसी रही जीव के मन प्रभु मूरत दीन तसि निहारे - Lyrical
Автор: Tilak - Bhojpuri
Загружено: 2026-02-04
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जब श्री कृष्ण मथुरा में पहुँच कर कंस के यज्ञ का धनुष तोड़ कर वह से कंस के सामने पहुँचते हैं तो श्री कृष्ण में किसी को विराट रूप के दर्शन होते हैं किसी को शक्तिशाली वीर योधा के दर्शन होते हैं। कंस को श्री कृष्ण में अपना काल देखायी देता है। इस गीत के माध्यम से यही कहा गया है की जिसकी जैसी भावना होती है भगवान उन्हें उसी रूप में दर्शन देते हैं।
"स्वर- रवींद्र जैन और अरविन्दर सिंह
गीत- रवींद्र जैन
संगीत- रवींद्र जैन"
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